आज लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण

भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर आज साल का अंतिम खग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारत समेत विश्व के कई हिस्सों में दिखाई देगी। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट 2 सेकंड होगी।

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पितरों की तस्वीर: कहाँ और कैसे लगाएं

घर में पितरों की तस्वीर लगाने का उद्देश्य सिर्फ स्मरण करना नहीं, बल्कि वास्तुशास्त्र के अनुसार सही दिशा और स्थान पर रखकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना है। गलत स्थान या दिशा पर तस्वीर लगाने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। इसलिए पितरों की तस्वीर को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में, दक्षिण की ओर मुख करके रखना सर्वोत्तम माना जाता है।

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“महाकाल” का गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खुलेगा

उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों को प्रवेश नहीं मिलेगा. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गर्भगृह में आम भक्तों के प्रवेश पर रोक और वीआईपी श्रद्धालुओं को विशेष अनुमति देने के उज्जैन कलेक्टर के आदेश को सही ठहराया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, इसका फैसला सिर्फ कलेक्टर ही करेंगे.

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बदलता गणपति उत्सव : भक्ति से दिखावे तक

गणपति बप्पा मोरया!….

यह जयघोष जब गूंजता है तो वातावरण भक्तिभाव से भर उठता है. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने जब 1893 में मुंबई में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा शुरू की थी, तब इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक और राजनीतिक उद्देश्य था. गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतवासियों को एकजुट करने और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना जगाने का यह एक सशक्त माध्यम बना. उस दौर में गणेशोत्सव ने समाज को जोड़ने, समानता और भाईचारे का संदेश देने का काम किया.

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राधाष्टमी : राधा-कृष्ण प्रेम की अनंत व्याख्या

भारतीय संस्कृति में प्रेम का सर्वोच्च रूप राधा और कृष्ण के संबंध में मूर्त होता है। राधाष्टमी का पर्व केवल राधा के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उस शाश्वत प्रेम का प्रतीक है, जिसमें आत्मा और परमात्मा का संगम झलकता है। राधा का व्यक्तित्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और आत्मविस्मृति का प्रतीक है। साहित्य में सूरदास, रसखान, बिहारी, जयदेव और नन्ददास जैसे कवियों ने राधा-कृष्ण प्रेम को लौकिक से परे जाकर अध्यात्म से जोड़ा है। राधा का प्रेम मिलन में ही नहीं, बल्कि विरह में भी पूर्ण है। यही निष्काम समर्पण उन्हें भक्ति का शिखर बनाता है। आज के समय में राधा-कृष्ण का प्रेम हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, बल्कि अर्पण से जीवित रहता है। राधाष्टमी का संदेश है—प्रेम को भौतिकता से ऊपर उठाकर जीवन को आध्यात्मिक सौंदर्य से भरना।

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नलखेड़ा का जागृत धाम

पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कौशल बंसल ने मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा के जीर्णोद्धार और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी आध्यात्मिक साधना, अनुभव और चमत्कारी घटनाओं से यह धाम आज एक जागृत शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है।

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गुरु की शरण सौभाग्य का द्वार – पं. राजरक्षितविजयजी

श्री संभवनाथ जिनालय, पुणे में आयोजित गुरु पूर्णिमा प्रवचन में पं. राजरक्षितविजयजी ने कहा – “संपत्ति भाग्य से मिलती है, लेकिन सद्गुरु सौभाग्य से मिलते हैं।” उन्होंने गुरु की सेवा को भगवान की सेवा से भी श्रेष्ठ बताया और जीवन में सद्गुरु के मार्गदर्शन की अनिवार्यता पर बल दिया।

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गुरु पूर्णिमा पर साधु वासवानी मिशन में १०८ हवनों से गूंजी श्रद्धा की स्वरधारा

साधु वासवानी मिशन, पुणे में गुरु पूर्णिमा का पर्व भक्ति, हवन और सेवा के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया। १०८ हवनों, भजन-कीर्तन, दीदी कृष्णा कुमारी के संदेश और जनसेवा गतिविधियों ने इस आयोजन को एक दिव्य अनुभव में बदल दिया। पूज्य साधु वासवानी और दादा जे.पी. वासवानी को समर्पित इस दिन ने श्रद्धालुओं के हृदय में गुरु के प्रति आस्था और समर्पण को और प्रगाढ़ किया।

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‘नामाचा गजर’ ‘नामाचा गजर’

कलाश्री संगीत मंडल द्वारा आयोजित ‘नामाचा गजर’ कार्यक्रम 6 जुलाई को एरंडवणे स्थित शकुंतला शेट्टी सभागृह में आयोजित किया जाएगा। पं. रघुनाथ खंडाळकर अपने पुत्रों के साथ प्रस्तुति देंगे, साथ ही पं. भीमसेन जोशी के पुत्र श्रीनिवास जोशी और पोते विराज जोशी भी मंच पर नजर आएंगे।

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