रिलीज से पहले झटका. हाईकोर्ट ने रोकी द केरल स्टोरी-2
केरल हाईकोर्ट ने ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई. अदालत ने सीबीएफसी के सर्टिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए दो हफ्ते में आपत्तियों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया.

केरल हाईकोर्ट ने ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाई. अदालत ने सीबीएफसी के सर्टिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए दो हफ्ते में आपत्तियों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया.
राजस्थान के किसान विकास कुमार सैनी ने 9 साल की मेहनत से ‘अजय राज’ नामक 6.5 से 7 फीट ऊंची गेहूं की किस्म विकसित की. यह मौसम प्रतिरोधी, पोषण से भरपूर और 40-45 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देने वाली किस्म है.
कुछ अनकहे रिश्ते” एक मार्मिक कहानी है जो दोस्ती, ममता और विश्वास के उस पवित्र बंधन को दर्शाती है, जिसे नाम की आवश्यकता नहीं होती। यह रचना भावनाओं की गहराई और रिश्तों की सच्चाई को स्पर्श करती है।
“मैं भी मनुष्य हूँ” कविता तीसरे लिंग के अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। यह रचना समाज से स्वीकार्यता और समानता की मांग करते हुए मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उजागर करती है।
“झूठा गांव” एक भावनात्मक कहानी है जिसमें किताबों के सुंदर गांव और बाढ़ से जूझते वास्तविक गांव का अंतर दिखाया गया है। गंगा की भीषण कटान के बीच एक बच्ची के टूटते सपनों की मार्मिक प्रस्तुति पाठकों को भीतर तक झकझोर देती है।
जमशेदपुर की साहित्यकार डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर शब्द प्रतिभा फाउंडेशन नेपाल द्वारा “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
महिदपुर रोड की 95 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका श्यामलता शर्मा, जिन्हें पूरा क्षेत्र “बड़ा बैनजी” के नाम से जानता था, अब हमारे बीच नहीं रहीं। बेटियों की शिक्षा के लिए उनका संघर्ष, उनका स्नेह और उनकी रोशन मुस्कान पीढ़ियों तक याद की जाएगी।
“बुढ़ापे की व्यथा” एक मार्मिक कविता है जो वृद्धाश्रम में बैठे माता-पिता की पीड़ा, उपेक्षा और टूटते पारिवारिक मूल्यों की करुण सच्चाई को उजागर करती है। यह रचना समाज को आईना दिखाती है और संतान को अपने कर्तव्यों की याद दिलाती है।
राँची, झारखंड की कवयित्री अर्पणा सिंह की यह मार्मिक ग़ज़ल प्रेम, विरह, तड़प और आत्मिक समर्पण की गहराइयों को उजागर करती है। “ज़िंदगी में तुम नहीं तो ज़िंदगी कुछ भी नहीं” पंक्ति के माध्यम से प्रेम की पूर्णता और विरह की पीड़ा का संवेदनशील चित्रण किया गया है।