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हिंसा और अहिंसा

हिंसा और अहिंसा केवल शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य की सोच और कर्म की दिशा हैं। कोई शरीर को मारता है, कोई मन को—और दोनों ही पीड़ा छोड़ जाते हैं। जो तड़पते को देखकर भी अकड़ जाए, वही सच्ची हिंसा है; और जो बिना कहे दुख हर ले, वही अहिंसा। जीवन की असली परीक्षा वहीं है, जहाँ करुणा सवाल बनकर खड़ी हो जाती है।

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ख़त : सैनिकों के नाम

सीमाओं पर खड़ा सैनिक सिर्फ़ बंदूक नहीं थामे होता, वह अपने घर, अपने बच्चों की हँसी और माता-पिता की आँखों की प्रतीक्षा भी वहीं छोड़ आता है। सर्दी, गर्मी और बरसात उसके लिए मौसम नहीं, कर्तव्य की परीक्षा होते हैं। देश की शान उसके कदमों में और भारत की नींद उसकी आँखों की जाग में सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि हर दुआ, हर नमन और हर उम्मीद सबसे पहले उसी के नाम लिखी जाती है।

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जुन्नर से गुजरात: 50 तेंदुए जा रहे नए घर

जुन्नर (महाराष्ट्र) से गुजरात तक तेंदुओं का बड़ा “मूवमेंट” होने वाला है। केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण ने 19 दिसंबर को महाराष्ट्र के जुन्नर वन विभाग के 50 जंगली तेंदुओं को गुजरात के ग्रीन प्राणी शास्त्रीय बचाव और पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी है। इस निर्णय से जुन्नर वन क्षेत्र के मानव-वन्यजीव संघर्ष में राहत मिलने की उम्मीद है।

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इंसानों से पहले कैसे भांप लेते हैं तूफान और बारिश

जब आसमान साफ हो और अचानक पक्षी नीचे उड़ने लगें, मेंढक शोर मचाने लगें या पालतू जानवर बेचैन हो जाएं, तो बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं, “आज बारिश होने वाली है.” सवाल यह है कि क्या जानवर सच में मौसम की आहट पहले सुन लेते हैं. विज्ञान कहता है, हां, लेकिन एक अलग तरीके से.

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बिना पोज, बिना प्रमोशन, सिर्फ प्यार

नया साल, चमकती रोशनी, जश्न में डूबा न्यूयॉर्क और उसी भीड़ में एक ऐसा पल जो किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था. रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण का न्यू ईयर सेलिब्रेशन अब सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की सबसे चर्चित लव स्टोरी बन चुका है.

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मुझे ऐतराज़ है…

यह लेख कैशलेस दौर के बीच घरेलू महिलाओं की उन छोटी-छोटी खुशियों को स्नेहिल व्यंग्य के साथ सामने रखता है, जो डिजिटल भुगतान की सुविधा में कहीं खो गई हैं। पति-पत्नी के साधारण संवाद के माध्यम से लेखिका स्मृतियों, आत्मसम्मान और भावनात्मक अधिकारों की बात करती हैं—जहाँ पति केवल जीवनसाथी नहीं, बल्कि भरोसेमंद “एटीएम” भी हुआ करते थे।

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अँधेरे में जुगनू

यह कविता प्रेम, प्रतीक्षा और आत्मसंवाद का सूक्ष्म आख्यान है। चाँद और बाहरी रोशनी को ठुकराकर कवयित्री अपने भीतर के जुगनुओं की रोशनी पर भरोसा करती है। लेकिन प्रेम की इच्छा जब प्रतीक्षा का दीपक बन जाती है, तो वही रोशनी धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है। यह रचना उस क्षण को पकड़ती है, जब मन अँधेरे से डरता नहीं, बल्कि उसे शांति और मुक्ति का स्थान मानने लगता है।

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जड़ें और बेलें

यह कथा कार्यस्थल पर छिपे शोषण और नकली सहयोग की पहचान कराती है। अमरबेल के सशक्त प्रतीक के माध्यम से यह संदेश देती है कि जिनकी अपनी जड़ें नहीं होतीं, वे दूसरों की मेहनत से पनपते हैं। आत्मबोध और सीमाएँ तय करना ही आत्मरक्षा और सशक्तिकरण का पहला कदम है।

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नया साल

यह रचना सालों के बदलने के बहाने मनुष्य की आदतों, हिंसा और संवेदनहीनता पर तीखा व्यंग्य है। 2025 और 2026 के संवाद के माध्यम से कवि यह प्रश्न उठाता है कि क्या नया साल सच में नया होता है, या वही पुरानी शरारतें नए कैलेंडर के साथ आगे बढ़ जाती हैं।

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