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कितनी अमायरा!

अखबारों की सुर्खियाँ कभी–कभार दहला देती हैं.जान देती बच्चियाँ, दबा दी जाती चीखें,और घोंघे सी रफ्तार से सरकतीं फाइलें। कुछ अमायरा साहस करती हैं, कुछ सहती हैं, कुछ ज़हर के घूंट पी जाती हैं…और कुछ अंतिम मुक्ति चुन लेती हैं।
बाल-दिवस पर याद आती है अमायरा. जिसकी मासूमियत दुनिया की क्रूरता से हार गई।

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वक्त की सुइयाँ

घड़ी की तीनों सुइयाँ जीवन के तीन मूल मंत्र सिखाती हैं. छोटी सुई धैर्य देती है, बड़ी सुई दिशा दिखाती है, और सेकंड की सुई हर पल की कीमत समझाती है। ये सुइयाँ रुकती नहीं, चाहे समय कैसा भी हो।हर टिक-टिक मानो याद दिलाती है.वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करता, वह बस आगे बढ़ता रहता है।

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पूर्वाग्रह

इवा की साइकिल गायब थी और रोती हुई बच्ची बार-बार पूछ रही थी.“मम्मा, किसने ली?”
मनोरमा को तुरंत शक उसी कचरा उठाने वाले मनोज पर गया, जिसने कुछ दिन पहले साइकिल मांगने की बात कही थी। शिकायत पर मनोज को सामने लाकर खड़ा किया गया, वह केवल इतना बोल सका. “मैडम, मैंने नहीं ली… CCTV देख लीजिए।” उसी समय अरविंद का फोन आया और सच सामने आ गया.साइकिल तो उन्होंने ही मरम्मत के लिए भेजी थी।.मनोरमा के भीतर अपराधबोध भर गया. शक उसका था, गलती उसका पूर्वाग्रह।

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आजोल यूथ क्लब के क्रिकेट महाकुंभ में उमड़ा जोश

मुंबई के कांदिवली स्थित स्पोर्ट्स अकादमी का माहौल रविवार, 16 नवंबर को सुबह से ही क्रिकेट के रंग में रंग चुका था. अजोल यूथ क्लब द्वारा आयोजित वन-डे लिमिटेड ओवर क्रिकेट टूर्नामेंट ने युवाओं में ऐसा जोश भर दिया कि पूरा मैदान तालियों, शोरगुल और उत्साह के नारों से गूंज उठा. टूर्नामेंट का शानदार आगाज़ मातोश्री उर्मिलाबेन शाह परिवार के हाथों शुभारंभ के साथ हुआ.

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मिलना उसे जो ढूंढने आएगा

एक अधूरी-सी दोस्ती, अनकहे जज़्बात और अचानक हुई गुमशुदगी…खोजते-खोजते वह वहीं पहुँचा जहाँ कभी उसने कहा था “याद आऊँ तो रेवा के तट पर आ जाना।” ढलते सूरज, ठंडी हवा और आधी शॉल में समा जाने वाली इस मुलाक़ात में प्रेम ने चुपचाप अपनी जगह फिर से पा ली।

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अब तो और भारी हो गए मोहन यादव

बिहार चुनाव की सुगबुगाहट शुरु होने से पहले मध्य प्रदेश के मोहन विरोधी नेताओं ने ऐसा माहोल बनाया था कि दिल्ली बहुत नाराज है। सीएम जितनी बार दिल्ली जाते हैं, अमित शाह फटकार लगाते हैं। केंद्र में मंत्री एक नेता ने तो सार्वजनिक मंच से बयान दे डाला था कि किसानों के हितों के लिये मुझे आंदोलन करना पड़ा तो पीछे नहीं हटूंगा। उनका यह बयान इसलिये भी दिल्ली के नेताओं को रास नहीं आया कि मप्र में सरकार भाजपा की ही है तो ऐसा बयान क्यों दिया।

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मुंबई में झूमा शब्द-सागर

राष्ट्रीय कवि संगम, हिंदी साहित्य भारती महिला प्रकोष्ठ तथा विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार, 17 नवम्बर 2025 को मुंबई प्रेस क्लब, आज़ाद मैदान में “अभिव्यक्ति के स्वर” राष्ट्रीय बहुभाषी कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। विभिन्न भाषाओं में गूँजती काव्यात्मक अभिव्यक्ति और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने इस साहित्यिक संध्या को अविस्मरणीय बना दिया।

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दिल, दर्द और दमखम

यह ग़ज़ल इंसानी समझ, रिश्तों की पेचीदगियों, आत्मसम्मान और देशप्रेम के सूक्ष्म भावों को बेहद नफ़ासत से पिरोती है। कभी दुनिया की चालाकियों पर तीखा सवाल उठाती है, तो कभी अपने ही घावों को मरहम की तरह सँभाल लेने का सलीका दिखाती है। इश्क़ की कोमल धड़कनों से लेकर हमदम और रकीब की पहचान तक हर शेर एक अलग दुनिया खोलता है। अंतिम शेर ग़ज़ल को असाधारण ऊँचाई देता है, जहाँ धर्म से ऊपर उठकर वतन को सर्वोपरि माना गया है। यह सिर्फ शायरी नहीं, जीवन के अनुभवों की तराशी हुई सच्चाई है।

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डर नहीं, दहाड़

अनिता की यह कहानी एक सामान्य-सी नौकरी से शुरू होकर शक्ति, साहस और आत्मसम्मान की विस्फोटक लड़ाई में बदल जाती है। स्कूल डायरेक्टर की कुटिल नीयत, मानसिक खेल और डराने-धमकाने की हर कोशिश को ध्वस्त करते हुए अनिता जिस तरह अपने स्वाभिमान की रक्षा करती है, वह हर उस लड़की की आवाज बन जाती है जो कार्यस्थल पर चुपचाप अन्याय सहती है।

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मुकेश “कबीर” को मिला राष्ट्रीय कलम गौरव सम्मान

देश के सुप्रसिद्ध गीतकार और व्यंग्यकार मुकेश “कबीर” को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ, प्रयागराज द्वारा राष्ट्रीय कलम गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।

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