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मुंबई में झूमा शब्द-सागर

कवियों की महफिल में सुर, भाव और शब्दों की अनूठी संगत

मुंबई से लाइव वॉयर न्यूज के लिए प्रसिद्ध लेखक गजानन महतपुरकर की रिपोर्ट

मुंबई, राष्ट्रीय कवि संगम, हिंदी साहित्य भारती महिला प्रकोष्ठ तथा विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार, 17 नवम्बर 2025 को मुंबई प्रेस क्लब, आज़ाद मैदान में “अभिव्यक्ति के स्वर” राष्ट्रीय बहुभाषी कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। विभिन्न भाषाओं में गूँजती काव्यात्मक अभिव्यक्ति और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने इस साहित्यिक संध्या को अविस्मरणीय बना दिया।

समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। मुख्य संयोजिका एवं राष्ट्रीय कवि संगम, मुंबई की अध्यक्षा रीमा राय सिंह ने सभी अतिथियों और रचनाकारों का स्मृति चिन्ह प्रदान कर स्वागत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ सिने गीतकार देवमणि पांडेय ने की, जबकि मंच का प्रभावी संचालन वरिष्ठ कवयित्री डॉ. वर्षा महेश द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मंच पर वरिष्ठ उद्घोषक आनंद प्रकाश सिंह, कवयित्री कमलेश पाठक, साहित्यकार नवीन चतुर्वेदी, कोंकण रेलवे के राजभाषा अधिकारी सदानंद चितले और समाजसेवी महेंद्र सुराणा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

काव्य-पाठ ने बाँधा समां

सम्मेलन में लगभग 30 रचनाकारों ने हिंदी, मराठी, अवधी, बंगाली और मैथिली भाषाओं में अपनी प्रभावशाली रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इनमें प्रमुख रूप से देवमणि पांडेय, संतोष कुमार झा, गजानन महतपुरकर, डॉ. कृपाशंकर मिश्र, रागिनी शाह, अरुण शेखर, अंजनी कुमार द्विवेदी, ओमप्रकाश तिवारी, किरण तिवारी, डॉ. रोशनी किरण, अनुपमा कड़वाड़, ताज मोहम्मद ताज, जागृति सिन्हा, अश्विनी उम्मीद लखनवी, पल्लवी रानी, अर्चना झा, अर्चना वर्मा सिंह, अक्षिता गोयल और लतिका शिंदे आदि शामिल रहे। सभी रचनाकारों ने अपनी विशिष्ट शैली और भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

“स्याही का सिपाही” का लोकार्पण

इस गरिमामय कार्यक्रम में कोंकण रेलवे के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संतोष कुमार झा के चौथे काव्य-संग्रह “स्याही का सिपाही” का लोकार्पण भी किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में श्री झा ने साहित्य की समाज में भूमिका और रचनाकारों के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।

आभार और समापन

समारोह के अंत में नवीन चतुर्वेदी और रीमा राय सिंह ने सभी अतिथियों व रचनाकारों के प्रति आभार प्रकट किया।
काव्य और संस्कृति की इस सौंधी शाम ने मुंबई की साहित्यिक धारा में एक और यादगार अध्याय जोड़ दिया।

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