वक्त की सुइयाँ

रेणु सिद्धू प्रसिद्ध लेखिका एवं साइकोलॉजिस्ट, जयपुर

छोटी सुई सब्र सिखाती,
बड़ी सुई कदम बढ़ाती,
और सेकंड की सुई बताती—
पल-पल की कीमत क्या होती।

ये सुइयाँ रुकती नहीं,
चाहे खुशियाँ हों या ग़म,
ये याद दिलाती रहती हैं—
चलना ही है जीवन का करम।

घड़ी की हर टिक-टिक में,
एक संदेश छुपा मिलता है—
वक्त इंतज़ार नहीं करता है
ये बस आगे ही बढ़ता है।।

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