सागर तुम्हीं दिखाओ कोई रास्ता…
लहरों, तूफ़ानों और गहराइयों के माध्यम से सागर से संवाद करती यह कविता जीवन के संघर्ष, धैर्य और हर हार के बाद नई शुरुआत का साहस देती है।

लहरों, तूफ़ानों और गहराइयों के माध्यम से सागर से संवाद करती यह कविता जीवन के संघर्ष, धैर्य और हर हार के बाद नई शुरुआत का साहस देती है।
“उसके प्लान पर विश्वास रखना” एक प्रेरक रचना है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों को ईश्वर की गहरी योजना के रूप में देखने का दृष्टिकोण देती है। यह रचना सिखाती है कि असफलता, दूरी और अभाव भी हमें मज़बूत, जागरूक और कृतज्ञ बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
ह कविता तात्कालिक सुख और अधैर्य से भरी दुनिया के बीच धैर्य, साधना और विचार की क्रान्ति का घोष है। रिश्तों को मौसमी फल-फूल नहीं, बल्कि चिनार और आम जैसे दीर्घजीवी वृक्ष मानते हुए यह रचना बताती है कि सच्चा परिवर्तन समय, सतत प्रयास और विश्वास से जन्म लेता है और वही विचारों की वास्तविक क्रान्ति है।
बचपन में आम की गुठलियाँ हमारी खुशियों का साधन थीं। महिदपुर रोड की गलियों में बिखरी गुठलियाँ अंकुरित होकर छोटे पौधे बन जाती थीं। हम उन्हें उखाड़कर घर लाते, पत्थर पर घिसते और फूँक मारकर सुनते “बज रहा है या नहीं।” टूटती गुठली पर डाँट और मार भी सहते, फिर अगले दिन फिर से तलाश में निकल पड़ते। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, वह सिर्फ़ खेल नहीं था. धैर्य, लगन और छोटे-छोटे प्रयासों की सीख भी थी, जो अब तक दिल में धीरे-धीरे बजती रहती है।
हार को स्वीकार करने का साहस ही सच्ची जीत की शुरुआत होता है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपना संयम और आत्मविश्वास बनाए रखता है, वही आगे चलकर मंज़िल तक पहुँचता है। रास्ते आज कठिन लग सकते हैं, पर यदि हौसलों से भरी कोशिश जारी रहे तो कल वही रास्ते सफलता की ओर ले जाते हैं। गिरना जीवन का स्वभाव है, पर हर बार गिरकर उठना और फिर आगे बढ़ना ही संघर्ष की असली पहचान है।
निरंतर प्रयास और पूरे विश्वास के साथ बढ़ते रहने से मंज़िल अवश्य मिलती है। चाहे राह में कठिनाइयाँ हों, नाव में छेद हों या अँधेरा छाया होहौसला और संकल्प टूटना नहीं चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे तिनकों से बना घोंसला, बड़ी बाधाओं का सामना कर लेते हैं। मेहनत ही वह चाबी है जो हर ताला खोलती है; अभ्यास से साधारण बुद्धि भी प्रखर हो जाती है। प्रेम, धैर्य और कर्म के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति अंततः अपनी मंज़िल पा ही लेता है।
घड़ी की तीनों सुइयाँ जीवन के तीन मूल मंत्र सिखाती हैं. छोटी सुई धैर्य देती है, बड़ी सुई दिशा दिखाती है, और सेकंड की सुई हर पल की कीमत समझाती है। ये सुइयाँ रुकती नहीं, चाहे समय कैसा भी हो।हर टिक-टिक मानो याद दिलाती है.वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करता, वह बस आगे बढ़ता रहता है।
स्त्री केवल कोमल नहीं, बल्कि परिवार और समाज की धुरी है। संस्कार, व्रत, उपवास और साधना के माध्यम से वह न केवल अपने भीतर शक्ति और संयम विकसित करती है, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में बाँधती है। यह कविता स्त्री की आंतरिक ऊर्जा, परंपरा और सशक्तिकरण को उजागर करती है।
कविता में दरिया को जीवन के संघर्ष और पवित्रता का प्रतीक बनाया गया है। दरिया मस्ती और ऊर्जा के साथ बढ़ती है, अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को पार करती है, किनारों से संबंध बनाए रखती है और दूसरों के कष्ट और पापों को समेटती है। यह अपने गंतव्य की ओर दृढ़ता और गति से बढ़ती है, अंततः समुद्र की विशाल बाहों में विलीन होकर अपने सफर का निष्कर्ष प्राप्त करती है। यह कविता दर्शाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, संयम, धैर्य और अपने मूल्यों के साथ मार्ग पर बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है।
जब दिल के मचलते भाव किसी अक्षर को ढूँढ लेते हैं, तो उन्हें बयान करने का अंदाज़ भी खोज लिया जाता है। जिन्हें उड़ने की चाहत होती है, वे पर ढूँढ लेते हैं और ज़मीन पर रहते हुए भी अपना आसमान पा लेते हैं। बच्चे बिना समझे पराए के अंतर को भी पहचान लेते हैं। उन्हें कमजोर करना आसान नहीं होता, क्योंकि अँधेरे में भी वे अपने मार्ग को प्रकाशमान बना लेते हैं। जो अपनी किस्मत खुद लिखते हैं, उन्हें अपने प्रयास पर विश्वास होता है और अवसर अपने आप ढूँढ लेते हैं। जिनके लिए मकान पक्का हो या न हो, वे सियासत के ज्वलनशील शोले भी पार कर लेते हैं। यह शरीर मिट्टी का बना है और मिट्टी में ही लौटना है, फिर भी वे अपनी आत्मा के दूसरे रूप को खोज लेते हैं। जब तक साँस चलती है, अर्चना को भी फुर्सत नहीं होती, फिर भी कुछ पल के लिए सुकून पा लेते हैं।