LIVE WIRE NEWS NETWORK

निशी और विनित परिणय सूत्र में बंधे

महिदपुर रोड के प्रतिष्ठित स्व. बापूलालजी कोचर एवं स्व. सजनबाई कोचर की पोत्री तथा श्री जितेंद्र कुमार कोचर (मावावाला) और श्रीमती अलका कोचर की पुत्री चि. सौ. कुमारी निशी कोचर का शुभविवाह शिवगढ़ (रतलाम) के सुप्रसिद्ध स्व. कालूरामजी एवं स्व. प्रेमकुंवरजी तांतेड़ के पौत्र तथा शाह श्री भूपेंद्रकुमार तांतेड़ और श्रीमती रेनुका तांतेड़ के सुपुत्र चि. विनीत तांतेड़ के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ।

Read More

सिंहस्थ 2028: उज्जैन में माइक्रो-लेवल प्लानिंग

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ माइक्रो-लेवल प्लानिंग के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। 4 नवंबर 2025 को मीडिया संवाद सत्र में पत्रकारों ने प्रोजेक्ट्स की गति देखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सराहना की। संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन सिंह ने शिप्रा जल संरक्षण और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रमुख कार्यों की प्रेज़ेंटेशन दी।
₹614.3 करोड़ का सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट शिप्रा को सालभर प्रवाहमान रखने की तैयारी में है और 2027 मानसून तक इसका परीक्षण प्रस्तावित है। वहीं ₹919 करोड़ की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट योजना शिप्रा में गंदा पानी मिलने को पूरी तरह रोक देगी। सिंहस्थ के लिए 29 किमी घाट, नया फोरलेन MR-22 और 19 नए पुल तेजी से बन रहे हैं।

Read More

साधु वेश में लूटपाट करने वाला गिरोह धराया

उज्जैन पुलिस ने हाईवे पर यात्रियों को साधु वेश में निशाना बनाने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। मंगलवार 11 नवंबर 2025 को साधु के वेश में घूम रहे इस गिरोह ने एक दंपत्ति से मारपीट कर लूटपाट की थी, जिसके मात्र कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने 7 आरोपियों को चेकिंग पॉइंट पर धर दबोचा।

Read More

क्या इंसानों के पास है सेवन्थ सेंस

-विज्ञान की सबसे कूल खोज, जो स्पर्श को नया अर्थ देती है सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज अब तक हम सिर्फ सिक्स्थ सेंस के बारे में ही जानते थे जो अदृश्य रूप से हमें संभावित घटना के बारे में आगाह कर देती थी.. आप सिक्स्थ सेंस से कुछ ऐसा महसूस कर सकते थे जो…

Read More

आख़िर में…

ज़िंदगी भर मुखौटे पहनती रही. अच्छी बीवी”, “अच्छी बहू”, “बेबस मां” के।
नींद हमेशा अधूरी रही, काम हमेशा पूरे हुए।
जब आख़िरकार सुकून की नींद मिली, तब भी किसी ने झिंझोड़ कर जगा दिया।अब तो मैं बस यही कहना चाहती हूं . “मुझे अब तो सोने दो… अब कोई मुखौटा नहीं, कोई फ़र्ज़ नहीं. बस नींद।”

Read More

पुनर्जन्म…

बस से मसूरी की यात्रा पर निकली साक्षी अपने परिवार के साथ मंदिर पहुँचती है। जैसे ही वह मंदिर के अहाते में कदम रखती है, एक बूढ़ा व्यक्ति उसे देखकर दौड़ा चला आता है और कहता है — “बिटिया, तू आ गई! मैं तेरा इंतज़ार कर रहा था।”
सब हैरान रह जाते हैं। बूढ़ा एक पुरानी तस्वीर दिखाता है . उसमें साक्षी जैसी ही एक लड़की थी, नाम लिखा था “नूरी”। बूढ़े की आँखों में आँसू हैं, और साक्षी के मन में एक अनजाना कंपन।
क्या यह महज़ संयोग है, या सचमुच किसी पुनर्जन्म की कहानी शुरू हो चुकी है?

Read More

स्त्री

स्त्री, हर ताले की चाबी अपने पास रखती है। घर के हर कोने में, हर रिश्ते में, वह सबकी ज़रूरतों और सपनों के ताले बड़ी आसानी से खोल लेती है। लेकिन विडंबना यह है कि उसके पास कभी अपनी ही मनमर्ज़ी की चाबी नहीं होती। दूसरों के लिए खुली हुई दुनिया के बीच, उसके अपने इच्छाओं का द्वार अकसर बंद रह जाता है।

Read More

मतदाता जागरुकता के लिए कांग्रेस ने निकाली प्रभात फेरी

महिदपुर विधानसभा क्षेत्र के महिदपुर रोड में गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान के अंतर्गत प्रभात फेरी निकाली गई. इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने लोगों से अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वाने और मतदान के प्रति सजग रहने का आह्वान किया. कार्यक्रम का नेतृत्व विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेश परमार और महिदपुर विधानसभा के विधायक दिनेशचंद्र बोस ने किया.

Read More

ये रेशमी जुल्फें

गाँव की गलियों में आजकल एक नई आवाज़ गूंजने लगी है. “माथा का बाल ले लो… पाँच हज़ार रुपए किलो!” पहली बार सुनने पर यह बात उतनी ही लुभावनी लगती है जितनी किसी मेले में सोने के दाम में चाँदी बेचने की। लेकिन सच्चाई कुछ और है .यह नया “धंधा” ग्रामीण महिलाओं की भोली मानसिकता और शहरी उद्योगों की चालाकी का संगम है।
गिरते बाल अब चिंता का नहीं, कमाई का विषय बन गए हैं। महिलाएँ इन्हें संभालकर रखती हैं, ताकि अगले महीने फेरीवाले से कुछ रुपये या सस्ता सामान पा सकें। पर असल में वे जिस चीज़ का सौदा कर रही हैं, वह उनका सौंदर्य और समझ दोनों हैं।ये बाल आगे चलकर विग, कॉस्मेटिक और विदेशी बाजारों में करोड़ों की कीमत पा जाते हैं।
सवाल यही है क्या हम सच में “बालों को बचा रहे हैं” या “अपनी समझ खो रहे हैं”?

Read More

टूटना एक डाल का…

जीवन की आंधियाँ जब चलती हैं, तो सिर्फ डालियाँ ही नहीं, कई बार इंसान भी टूट जाते हैं . अपने ही सदाचार और शुभ कर्मों के बोझ से। इस टूटने में भी एक सच्चाई है जैसे परिंदों के घोंसले बिखर जाते हैं, पर वे नई जगह फिर से घर बना लेते हैं। कोयल की तान कहीं खो जाती है, मगर उसकी खोज जारी रहती है। यही जीवन का शाश्वत चक्र है . गिरना, बिखरना और फिर उठना।

Read More