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आचरण

प्रगति त्रिपाठी, लेखिका, बंगलुरू

एक परिचर्चा के लिए शहर के सम्मानित लोगों को बुलाया गया था। मंच पर परिचर्चा शुरू हुई। दोनों तरफ के अतिथि अपनी बात सही ठहराने के लिए आपस में भिड़ गए। एक अतिथि ने दूसरे पर दोषारोपण किया तो प्रतिकार में दूसरे ने उनकी इज्जत उछालनी शुरू कर दी। धीरे-धीरे लड़ाई अब व्यक्तिगत रूप लेने लगा। बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों एक दूसरे को मारने की धमकी तक देने लगे।
मंच की प्रतिष्ठा धूमिल होते हुए देखकर आयोजक दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश करने लगे। इस हंगामे के बीच परिचर्चा का मूल विषय ‘ जीवन में शिष्ट आचरण का महत्व’ कहीं लुप्त हो गया।

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