आचरण
शहर के प्रतिष्ठित लोगों के बीच आयोजित परिचर्चा अचानक गरमा गई। विषय था “जीवन में शिष्ट आचरण का महत्व”, पर अतिथि आपसी आरोप–प्रत्यारोप में इतने उलझे कि बहस व्यक्तिगत हमलों में बदल गई। मंच का सम्मान दांव पर लग गया और आयोजक शांति बहाल करने की कोशिश करते रहे। विडंबना यह कि शिष्ट आचरण पर चर्चा करने आए लोग स्वयं ही उसका पालन करना भूल गए।
