मैं नारी हूँ जागीर नहीं

स्वतंत्र और आत्मविश्वासी भारतीय महिला नारी अधिकार और समानता का प्रतीक बनकर खड़ी

रुचि अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

मैं नारी हूँ जागीर नहीं
क्यों आजाद जीवन की हकदार नहीं ?
मैं नहीं किसी की कठपुतली
प्रताड़ना मुझे स्वीकार नहीं ।

हाथों में गर पहनू चूड़ी
तो क्या बल कम हो जाता है
गृहणी बन जब करू मै सेवा
क्यों मान ना दिया जाता है ?

मरकर जन्म दिया जिस शिशु को
क्यों वंशज पिता का कहलाता है
क्यों मेरा मेरे अंश पर से
अधिकार घटाया जाता है ?

रहते है हम सबकी सुनके
पर गुलामी नहीं स्वीकारी है
ये हमारा निस्वार्थ प्रेम है
ना ही कोई लाचारी है ।

सबकी खुशियों की परवाह कर
खुद को पीछे रखते हैं
वही लोग हमें सबसे ज्यादा
क्यों बेमोल समझते हैं ?

हमारे त्याग और प्रेम का
क्या यही प्रतिकार है ?
हम नारी है जागीर नहीं
हमे भी स्वतंत्रता से जीने का , पूर्ण अधिकार है ।

3 thoughts on “मैं नारी हूँ जागीर नहीं

  1. शानदार …खूबसूरत.. आगाज…बेहतरीन अंदाज👏👏

  2. सही कहा है स्वंत्रता से जीने का पूरा अधिकार है।
    बहोत सुंदर आपके भाव👍👍👍👍

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