स्वतंत्र और आत्मविश्वासी भारतीय महिला नारी अधिकार और समानता का प्रतीक बनकर खड़ी

मैं नारी हूँ जागीर नहीं

यह कविता नारी की स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और अधिकारों की बुलंद आवाज़ है। समाज में स्त्री को जागीर समझने की मानसिकता पर तीखा प्रहार करती यह रचना समानता और सम्मान की माँग करती है।

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