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मन के अहाते का पेड़

कृष्णा तिवारी कृति, प्रसिद्ध लेखिका, नागदा जंक्शन (मध्यप्रदेश)

खलिश का
एक पेड़ लगा है
मन के अहाते में
खटकता है सुनापन
काश..उसकी फुनगी पर भी
कलियाँ आती..
पतझड़ के बाद बसंत
फिर सावन,
बस,, यही सावन..
राखी का….
नयनों को और सावन कर जाता
पल्लू में बंधे आशीष
धरातें कभी दुआए देहरी पर
सुनें पेड़ का मन
आसमान हों जाता
वो फल भरी डालियाँ
झुमती है मन के अहाते में
मगर दूसरे आँगन में फल
नहीं गिराती..कभी।
अहाते में फलता मोगरा
खुशबु से भरता मन को
कहता है..
अपने तन के साथ कभी
दूसरे का साया नहीं होता

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