Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

मन के अहाते का पेड़

कृष्णा तिवारी कृति, प्रसिद्ध लेखिका, नागदा जंक्शन (मध्यप्रदेश) खलिश काएक पेड़ लगा हैमन के अहाते मेंखटकता है सुनापनकाश..उसकी फुनगी पर भीकलियाँ आती..पतझड़ के बाद बसंतफिर सावन,बस,, यही सावन..राखी का….नयनों को और सावन कर जातापल्लू में बंधे आशीषधरातें कभी दुआए देहरी परसुनें पेड़ का मनआसमान हों जातावो फल भरी डालियाँझुमती है मन के अहाते मेंमगर दूसरे…

Read More

यादें

मन जब अतीत की ओर लौटता है तो उसे उन अधूरी इच्छाओं और अधूरे पलों का बोध होता है, जो समय की सीमाओं में बँधकर कभी साकार न हो सके। प्रेम के वे भाव, जो पूरी तरह व्यक्त होने से पहले ही ठहर गए—जैसे बादल तो आए, मन के आकाश में छा गए, पर बरसने से पहले ही थम गए। उन भावों की सुगंध, उन इच्छाओं की मासूमियत आज भी भीतर कहीं जीवित है, पर वे कभी वास्तविकता का रूप न ले सकीं।
इन्हीं स्मृतियों में यह सत्य भी उजागर होता है कि जीवन में सब कुछ पूर्ण नहीं होता। कुछ बहारें अधूरी रह जाती हैं, कुछ ऋतुएँ बिना खिले ही ढल जाती हैं। प्रेम की गहराई भी कई बार अपने संपूर्ण रूप तक नहीं पहुँच पाती। यह अधूरापन ही जीवन का हिस्सा है.

Read More

वर्जित इच्छाओं की अपराधिनी…

आज-कललम्बे दिनऔर छोटी रातों मेंकई ख्वाबएक-सी शक्ल लिएआ रहे हैं और दिनबहुत देर सेअलसाई-सी शाम मेंतब्दील हो रहा नहीं-नहींये खूब तेजचुहचुहाती गर्मियों वाले दिन नहीं ये तो बस अभी-अभी आयेवसंत के पीले दिन हैंजो अचानकइस लॉक डाउन मेंप्रौढ़-से हो गए हैं इस बारहोली के सतरंगीदिनों के बादजाने क्यों इतनेबेरंग से हो गए हैंदिन-रात अपने जन्म…

Read More