मैं सच को बयां करती हूं

डॉ.नेत्रा रावणकर, प्रसिद्ध साहित्यकार, उज्जैन मैं सच को बयां करती हूंअंगारों पर चलती हूंमैं गीत नए रचती हूंख्वाब नए चुनती हूं गहन तम को चीरकरअरुणिमा जगाती हूंटूटकर बिखरती हूंखुद को पिरो लेती हूं सूरज से आग लिएदीपक से राग लिएधरती का हरितस्वप्नआंचल में सजाती हूं कांटो की पृष्ठ परफूलों की कलम सेवसंत की आस लिएपतझड़…

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मन के अहाते का पेड़

कृष्णा तिवारी कृति, प्रसिद्ध लेखिका, नागदा जंक्शन (मध्यप्रदेश) खलिश काएक पेड़ लगा हैमन के अहाते मेंखटकता है सुनापनकाश..उसकी फुनगी पर भीकलियाँ आती..पतझड़ के बाद बसंतफिर सावन,बस,, यही सावन..राखी का….नयनों को और सावन कर जातापल्लू में बंधे आशीषधरातें कभी दुआए देहरी परसुनें पेड़ का मनआसमान हों जातावो फल भरी डालियाँझुमती है मन के अहाते मेंमगर दूसरे…

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