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कुछ राखियाँ…

डाकखाने में पड़ी अनपहुंची राखियां और लिफाफे

संध्या यादव, मुंबई

कुछ राखियों को

लिफाफे नहीं मिले

और कुछ

लिफाफों को राखियां

कुछ ऐसे भी थे

जिन पर पते ही नहीं थे

ऐसी तमाम राखियां और लिफाफे

प्रतीक्षारत हैं

किसी डाकखाने के लिये…

ये कभी -कहीं नहीं पहुंचेंगी
अब ये रक्षा के बंधन से मुक्त हो चुके हैं

3 thoughts on “कुछ राखियाँ…

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