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रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बाँधती बहन

अनमोल प्रेम

कच्चे धागे में बंधा भाई-बहन का प्रेम किसी अनमोल रिश्ते से कम नहीं. रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समर्पित यह कविता स्नेह, सम्मान और सुख-दुख में साथ निभाने की भावना को अभिव्यक्त करती है.

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डाकखाने में पड़ी अनपहुंची राखियां और लिफाफे

कुछ राखियाँ…

कुछ राखियों को लिफाफे नहीं मिले और कुछ लिफाफों को राखियाँ. कुछ पर पते ही नहीं थे. यह कविता उन राखियों की कहानी है, जो कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुँच सकीं और अब रक्षा के बंधन से मुक्त हो चुकी हैं.

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रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बाँधती बहन

स्नेह की डोर : राखी

राखी केवल भाई की कलाई पर बंधा एक धागा नहीं, बल्कि उसमें बहन का स्नेह, भाई के लिए दुआएँ और बचपन की अनगिनत यादें बंधी होती हैं. ‘स्नेह की डोर — राखी’ भाई-बहन के इसी खूबसूरत रिश्ते की भावनात्मक कहानी है.

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रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन

रक्षाबंधन

खेल-खिलौनों और बचपन की हंसी-ठिठोली से लेकर राखी के नेह भरे धागों तक, यह कविता भाई-बहन के उस खूबसूरत रिश्ते की याद दिलाती है, जिसमें बचपन, दुआएं और स्नेह हमेशा साथ रहते हैं.

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