अनमोल प्रेम
कच्चे धागे में बंधा भाई-बहन का प्रेम किसी अनमोल रिश्ते से कम नहीं. रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समर्पित यह कविता स्नेह, सम्मान और सुख-दुख में साथ निभाने की भावना को अभिव्यक्त करती है.
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कच्चे धागे में बंधा भाई-बहन का प्रेम किसी अनमोल रिश्ते से कम नहीं. रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समर्पित यह कविता स्नेह, सम्मान और सुख-दुख में साथ निभाने की भावना को अभिव्यक्त करती है.
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कुछ राखियों को लिफाफे नहीं मिले और कुछ लिफाफों को राखियाँ. कुछ पर पते ही नहीं थे. यह कविता उन राखियों की कहानी है, जो कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुँच सकीं और अब रक्षा के बंधन से मुक्त हो चुकी हैं.
राखी केवल भाई की कलाई पर बंधा एक धागा नहीं, बल्कि उसमें बहन का स्नेह, भाई के लिए दुआएँ और बचपन की अनगिनत यादें बंधी होती हैं. ‘स्नेह की डोर — राखी’ भाई-बहन के इसी खूबसूरत रिश्ते की भावनात्मक कहानी है.