
पूनम शर्मा स्नेहिल, जमशेदपुर
खेल खिलौने हंसी ठिठोली बचपन की सौगातें।
याद बहुत आती है वह सब खट्टी मीठी बातें ।।
सबसे बेहतर बचपन था हिल मिल संग जब खेले।
आस-पास बस रहते थे हाँ खुशियों के ही मेले ।।
दे आशीष रही दोनों को जो चाहे वह पाओ।
नील गगन पर बन कर सूरज दोनों ही छा जाओ।।
नेह समेटे इन धागों में भेज दिया है तुमको।
भूल न जाना भाई मेरे संघर्षो में मुझको ।।
रोली टीका चंदन कुमकुम हर ले सभी बलाएं।
खुशियों की सौगातें लेकर पर्व में घर में आए।।
