राखी नहीं, बहन ने दी नई जिंदगी
रक्षाबंधन पर जबलपुर की राखी गुप्ता ने अपने छोटे भाई सोनू को अपनी किडनी दान कर जीवन का सबसे अनमोल तोहफा दिया. वर्षों से डायलिसिस करा रहे सोनू के लिए बहन का यह त्याग नई जिंदगी की उम्मीद बन गया.

रक्षाबंधन पर जबलपुर की राखी गुप्ता ने अपने छोटे भाई सोनू को अपनी किडनी दान कर जीवन का सबसे अनमोल तोहफा दिया. वर्षों से डायलिसिस करा रहे सोनू के लिए बहन का यह त्याग नई जिंदगी की उम्मीद बन गया.
कच्चे धागे में बंधा भाई-बहन का प्रेम किसी अनमोल रिश्ते से कम नहीं. रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समर्पित यह कविता स्नेह, सम्मान और सुख-दुख में साथ निभाने की भावना को अभिव्यक्त करती है.
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राखी के दिन भाई ने मजाक में कहा कि वह पैसे नहीं देगा और बहन ने गुस्से में उसकी राखी ही तोड़ दी। बचपन की यह छोटी-सी नोकझोंक आज एक ऐसी याद बन चुकी है, जो भाई-बहन के रिश्ते की मासूमियत और अपनापन बयां करती है।
राखी केवल भाई की कलाई पर बंधा एक धागा नहीं, बल्कि उसमें बहन का स्नेह, भाई के लिए दुआएँ और बचपन की अनगिनत यादें बंधी होती हैं. ‘स्नेह की डोर — राखी’ भाई-बहन के इसी खूबसूरत रिश्ते की भावनात्मक कहानी है.
सावन की फुहारों के बीच मीता की आँखों के सामने मायके की सुनहरी यादें ताजा हो जाती हैं। बिछड़ चुके अपनों की कमी और भाई-भाभी के स्नेह से भरी यह कहानी रिश्तों की गहराई को छूती है।
सावन की फुहारों के साथ सुमन को अपने मायके और माँ की याद सताने लगती है। राखी, फेनी और घेवर से जुड़ी छोटी-सी याद उसे उन रिश्तों तक ले जाती है, जो अब उसके जीवन में नहीं हैं।