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शब्दों की विहांगी : नीलम पेड़ीवाल

कलम, कर्म और सृजन की मूर्ति से नीलम पेड़ीवाल से विशेष बातचीत

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

हिंदी साहित्य जगत में नीलम पेड़ीवाल विहांगी एक ऐसा नाम है, जिन्होंने शिक्षण और साहित्य साधना के बीच सुंदर संतुलन स्थापित करते हुए अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है कविता, दोहा, चौपाई, कहानी, लघुकथा, भजन और संस्मरण जैसी विविध विधाओं में सृजनरत विहांगी जी की रचनाओं में संवेदनशीलता, सामाजिक सरोकार और सकारात्मक दृष्टि का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है साहित्यिक संस्थाओं से सक्रिय जुड़ाव, निरंतर सृजनशीलता और लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज उपलब्धि ने उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को और भी विशिष्ट बनाया है प्रस्तुत है उनसे हुई एक विशेष बातचीत-

प्रश्न- आप अपने बारे में बताइए?
उत्तर- मैं एक शिक्षिका हूं, परिवार में सास, पति बेटा और बेटी है, पति और बेटी जॉब करते हैं तथा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है.

प्रश्न-आपके साहित्यिक जीवन की शुरुआत कब और कैसे हुई? लेखन की प्रेरणा आपको किससे मिली?
उत्तर-
मेरी साहित्यिक जीवन की शुरुआत बचपन से ही हुई . विद्यालय में भाषण, कविता, लेखन के साथ-साथ हर प्रतियोगिताओं में भाग लेती थी जिससे भी मेरे शब्दों में आत्मीय संबंध बनते गए तथा और अच्छा करने की प्रेरणा मिलती गई. परिवार में मेरे दादा जी से मुझे साहित्यिक संस्कार मिले. जीवन के अनुभवों ने मेरी लेखन क्षमता को विकसित कर नई दिशा प्रदान की.

प्रश्न- आपने कविता, दोहा, चौपाई, कहानी, लघुकथा, भजन, संस्मरण आदि अनेक विधाओं में लेखन किया है इनमें से आपकी सर्वाधिक प्रिय विधा कौन-सी है और क्यों?
उत्तर
-हांँ मैंने इन सभी विधाओं में लेखन कार्य किया है परंतु कविता मेरी सबसे प्रिय विधा है क्योंकि इसमें हम अपनी भावनाओं, विचारों एवं अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त कर सकते हैं तथा यह हमारी आत्म अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है.

प्रश्न- एक शिक्षिका और साहित्यकार की दोहरी भूमिका निभाते हुए आप समय का संतुलन किस प्रकार बनाती हैं?
उत्तर
-मेरे लिए शिक्षण के साथ-साथ साहित्य भी बहुत जरूरी है. शिक्षण कार्य के बाद बाकी का समय मैं साहित्य में देती हूँ विद्यालय से मिले अनुभव मेरी रचना को समृद्ध करते हैं और साहित्य मुझे विद्यार्थियों तक बेहतर ढंग से पहुँचने की प्रेरणा देता है. समय प्रबंधन, अनुशासन और निरंतर अध्ययन इस संतुलन का आधार है.

प्रश्न-आपके उपनाम विहांगी का क्या अर्थ है और इसके पीछे कोई विशेष प्रेरणा या कहानी है?
उत्तर-
विहाँगी का अर्थ है- आकाश में स्वतंत्र रूप से उड़ने वाली पक्षी. मैंने संघर्षपूर्ण जीवन जीकर हर मुसीबतों को पार करके अपनी मंजिल को पाने की हरदम कोशिश की है और अपनी जिंदगी के फैसले हमेशा खुद लिए हैं . निर्भय होकर जीना सीखा है जिंदगी में कुछ अच्छा करने का अलग जुनून हो तो कामयाबी आपको एक न एक दिन जरूर मिलती है. आप बस समस्याओं से घबराइए नहीं, बस आगे बढ़ते रहिए देखना आपको एक न एक दिन लक्ष्य की प्राप्ति जरूर होगी.


प्रश्न- महिला काव्य मंच, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्? तथा सोशल एंड मोटिवेशनल ट्रस्ट जैसी संस्थाओं से जुड़े आपके अनुभव साहित्य और समाज को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर
-इन संस्थाओं से जुड़कर मुझे वरिष्ठ साहित्यकारों तथा काव्य सम्मेलन के लिए दूसरी जगह जाने से वहाँ के साहित्यकारों से बहुत कुछ सीखने और संवाद का अवसर मिला इससे मेरी साहित्यिक दृष्टि विस्तृत हुई तथा और श्रेष्ठ लिखने की प्रेरणा मिली.

प्रश्न-आज के डिजिटल युग में हिन्दी साहित्य की स्थिति को आप किस दृष्टि से देखती हैं? क्या सोशल मीडिया साहित्य के लिए अवसर है या चुनौती?
उत्तर
-डिजिटल युग में हिंदी साहित्य के लिए बहुत अवसर है सोशल मीडिया ने साहित्य को पाठकों तक पहुँचाया है .अगर यह सिलसिला जारी रहा तो हिंदी साहित्य का भविष्य अत्यंत उज्जवल होता जाएगा.

प्रश्न – आपके साझा संकलनों और प्रकाशित रचनाओं में कौन-सी ऐसी कृति है जो आपके हृदय के सबसे निकट है और क्यों?
उत्तर-
वैसे तो मेरी प्रत्येक रचना मेरे हृदय के निकट है परंतु मुझे वे रचनाएँ विशेष प्रिय जो सामाजिक मुद्दों पर लिखी गई है और इसके साथ पाठकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मेरी रचनाओं को और अधिक उत्कृष्ट बना देती है.

प्रश्न-साहित्य साधना के दौरान आपको किन संघर्षों का सामना करना पड़ा और उनसे आपने क्या सीखा?
उत्तर
-एक स्त्री का जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण होता है पूरे दिन में उसे नौकरी तथा घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए लेखन के लिए समय निकालना बहुत ही चुनौती पूर्ण होता है परंतु निरंतर अभ्यास, लगन, धैर्य और साहित्य के प्रति समर्पण ने हर परिस्थिति में मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

प्रश्न- लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होना आपके लिए कितना महत्वपूर्ण रहा? इस उपलब्धि ने आपके साहित्यिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया?

उत्तर
-यह मेरे लिए अत्यंत ही गौरव की बात है इस उपलब्धि ने मुझे साहित्य के क्षेत्र में बेहतर करने की प्रेरणा दी है

प्रश्न- नवोदित रचनाकारों, विशेषकर महिलाओं और युवा साहित्यकारों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी, जो साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं?
उत्तर-
हर दिन कुछ ना कुछ पढ़ते रहिए अपने ज्ञान को बाँटने की कोशिश करें. इससे आपका ज्ञान बढ़ेगा कुछ ना कुछ जरूर लिखें धैर्य रखें क्योंकि मंजिल एक दिन में नहीं मिलती है. उसके लिए बहुत संघर्ष करने पड़ते हैं . साथ ही अपनी मौलिकता बनाए रखें समाज के लिए सकारात्मक लेखन करते हुए आगे बढ़ते रहिए आपको एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेंगी.



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8 thoughts on “शब्दों की विहांगी : नीलम पेड़ीवाल

  1. नीलम जी से मुलाकात (के बारे में पढ़कर) कराने के लिए शुक्रिया सुरेश जी ।

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