शब्दों की विहांगी : नीलम पेड़ीवाल

नीलम पेड़ीवाल “विहांगी” हिंदी साहित्य की एक सक्रिय और बहुआयामी रचनाकार हैं। इस विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपने साहित्यिक सफर, लेखन प्रेरणा, संघर्ष, उपलब्धियों और नए रचनाकारों के लिए महत्वपूर्ण संदेश साझा किए हैं।

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गहनों की चमक के बीच कविता और संस्कृति की झिलमिलाहट

त्यौहारों की चहक, लोकगीतों की मिठास और कविता की गूंजइन सबका संगम उस शाम देखने को मिला, जब सेनको गोल्ड शॉप ने तीज पर्व के अवसर पर एक विशेष आयोजन किया. आमतौर पर चमचमाते गहनों और ग्राहकों की चहल-पहल से सजी इस शॉप ने उस दिन संस्कृति, परंपरा और कला का रंगीन आँगन सजाया. शाम की शुरुआत पारंपरिक मेहंदी से हुई. आमंत्रित कवयित्रियों के हाथों में मेहंदी रचाई गई, जिसने पूरे वातावरण को तीज की सुगंध से भर दिया. मुस्कुराहटों और गीतों के बीच यह दृश्य मानो घर-आँगन के उत्सव को जीवंत कर रहा था.

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