Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

महक

जब से तुमसे नयन मिले

दीप्ति अग्रवाल दीप, प्रसिद्ध लेखिका, नई दिल्ली

जब से तुमसे चोरी-चोरी नयन मिले हैं,
पंख लगे इच्छाओं को नव अयन मिले हैं।।

दिल की दिल से बातों को दिल तरस रहा है,
कैसे मिलने आऊँ, सावन बरस रहा है।।

रिमझिम ठंडी बूँदें कैसी अगन लगातीं,
कुछ सूझे कब, केवल तेरी लगन लगातीं।।

क्या तेरे दिल में भी हसरत मचल रही है,
मुझसे मिलने की उत्कंठा प्रबल रही है।।

प्रेम-सुधा जब से पी, मनवा बहक उठा है,
पा तेरा सानिध्य, हृदय यह महक उठा है।।

हर सुख-दुख में साथ रहें हम, कसम निभाएँ,
प्रणय-सूत्र के बंधन की हर ,रसम निभाएँ।।
ये रचनाएं भी पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें-
शब्दों का जादू
इश्क़: पहली सांस भी, आख़िरी भी
पल-पल जीवन
विंध्यवासिनी माता

2 thoughts on “महक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *