जब से तुमसे नयन मिले

महक

जब से हमारी नज़रें मिली हैं, दिल की दुनिया बदल सी गई है. इच्छाओं को जैसे नए पंख मिल गए हैं और हर ख्वाहिश अब तुम्हारी ओर ही उड़ती है. दिल की बातें दिल तक पहुंचने को तरस रही हैं, लेकिन सावन की बरसात हमारे मिलने में दूरी बनकर खड़ी है. हर बूंद में एक अजीब सी आग है, जो तुम्हारी याद और लगन को और गहरा कर देती है. मन में बस एक ही चाह है तुमसे मिलना, तुम्हारे करीब आना, और इस प्रेम को हर पल जीना.

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जरा जरा तू हमसे मिल कविता

जरा-ज़रा तू हमसे मिल

जरा जरा तू हमसे मिल, तनिक तनिक उतर मेरे दिल…” यह कविता प्रेम के उन कोमल एहसासों को छूती है, जहाँ शब्द कम और नजरों की भाषा ज़्यादा बोलती है। मिलन की चाह, दिल की तड़प और अनकहे जज़्बातों को बेहद खूबसूरती से पिरोती यह रचना पाठक के मन में एक मधुर रोमांटिक लहर जगा देती है।

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