बालकांड: जहां से शुरू हुई श्रीराम की मर्यादा
रामायण कथा श्रृंखला के प्रथम भाग बालकांड में पढ़ें भगवान श्रीराम के जन्म, बाल्यकाल, विश्वामित्र के साथ वनगमन, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और माता सीता स्वयंवर की दिव्य एवं प्रेरणादायक कथा।

रामायण कथा श्रृंखला के प्रथम भाग बालकांड में पढ़ें भगवान श्रीराम के जन्म, बाल्यकाल, विश्वामित्र के साथ वनगमन, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और माता सीता स्वयंवर की दिव्य एवं प्रेरणादायक कथा।
सुबह और शाम दीपक जलाने की परंपरा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक है। जानिए शास्त्र क्या कहते हैं और क्या किसी दिन दीपक न जलाने से भगवान सचमुच नाराज़ हो जाते हैं।
महाबली हनुमान के जन्म दिवस पर भक्तों में उत्साह और भक्ति की लहर है. यह कविता उनकी शक्ति, विनम्रता और श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम को समर्पित है.
माँ के दिव्य स्वरूप और मातृत्व, शक्ति, और ममता की अनुभूति का सुंदर चित्रण करती है। इसमें कवि माँ को आकाश सा विशाल हृदय और धरती का धीरज रखने वाली मानते हैं, जो बिना मांगे सब देती हैं और हर समय अपने भक्तों के साथ रहती हैं। कवि माँ से सुख-दुख में साथ रहने, हर सांस में उनका आशीर्वाद पाने और जीवन में उनके दर्शन करने की प्रार्थना करता है। यह कविता भक्ति, श्रद्धा और आत्मीय स्नेह का प्रतीक है, जो माँ की महिमा और उसके संरक्षण की भावना को उजागर करती है।
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गीता शब्द को सुनते ही मन में जिज्ञासा आना स्वाभाविक है की इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी। भगवान कृष्ण को अपने अलौकिक रूप में आकर रणक्षेत्र के बीच उपदेश देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।कहते है उस समय रणक्षेत्र का दृश्य था की एक तरफ कौरवों की सेना दूसरी तरफ पांडवो की सेना थी और अपने ही परिवार जानो को दिख अर्जुन विचलित हो जाते है।