gulmohar

राख की आग

राख के बीच खड़ी आत्मविश्वासी भारतीय महिला जो स्त्री के प्रतिरोध और जागरूकता का प्रतीक है जब स्त्री अपनी चुप्पी तोड़कर अन्याय के विरुद्ध खड़ी होती है, तब उसकी चेतना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।

संध्या यादव, मुंबई

बिस्तर में औरत के
ठंडे होने की शिकायत कर
दस जगह मुँह मारने का
सर्टिफिकेट लेकर घूमने वाले
मर्द ने अपनी बाँहों में तड़पती
गर्लफ्रेंड को सच्चाई कभी नहीं बताता…
सेक्स पावर बढ़ाने वाली
सारी दवाइयाँ और नामर्दगी का
इलाज करने वाले सारे डॉक्टर
जब जवाब दे चुके थे, ठीक उसी वक्त
किसी शहर के, किसी परिवार की
चौथी लड़की के साथ छत्तीस गुण जोड़े थे
बिचौलिए ने भारी-भरकम दक्षिणा लेकर…
और लड़की के बाप के
हाथ में थमा दहेज की लिस्ट,
“बारातियों के स्वागत में कमी नहीं होनी चाहिए”
की ताकीद दे, उस लड़की को बहू बना
उसके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के
गौरव से फूले थे लड़के के घरवाले…
शादी के सात साल बाद भी बाँझ बहू
के बोझ से अधमरा होता,
सुपुत्र के अभिमान में डूबा परिवार
बहू को जब गरियाता है,
ठीक वैसे ही किसी समय पर
खानदान का चिराग किसी गर्लफ्रेंड
के कदमों में सिर झुका प्रेम का दीपक जलाता है…
सदियों से आज तक समाज ने
ये समझा ही नहीं,
बिस्तर पर एड़ी रगड़ती औरत की चुप्पी
उनकी इज्जत पर लगा अलीगढ़ी ताला है…
ज़रूरी है ऐसी उनींदी कमबख्त औरतों को
उठते-बैठते तानों का चाबुक मारा जाए,
सर पर छत और दो वक्त की रोटी में ही
उलझाया जाए।
वे जानते हैं,
लोहे को जंग,
नमक को पानी,
आग को हवा से हमेशा ख़तरा होता है
और बहुत ज़्यादा ख़तरा होता है
उस जागती हुई औरत से,
जो राख को धता बताती हुई
आग बनने की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी है…

इन रचनाओं को भी पढ़ें

तुम्हारे ख़्वाबों में आने की चाह
आभार
आधुनिक नारी और नवरात्रि की गाथा
आवाज़
प्यार कोई स्विच नहीं होता
शिक्षा : उज्ज्वल भविष्य और सशक्त समाज की आधारशिला
आधा चेहरा
ख़्वाबों का घर
राख की आग

5 thoughts on “राख की आग”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *