gulmohar
राख के बीच खड़ी आत्मविश्वासी भारतीय महिला जो स्त्री के प्रतिरोध और जागरूकता का प्रतीक है

राख की आग

समाज की दोहरी मानसिकता, पुरुषों के विरोधाभासी आचरण, दहेज प्रथा और संतान के लिए स्त्री को दोषी ठहराने की परंपरा पर सवाल उठाती यह कविता उस औरत की आवाज़ है, जो लंबे समय तक चुप रहने के बाद अपने भीतर की आग पहचानने लगती है।

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