साहित्य राख की आग LIVE WIRE NEWS NETWORK1 week ago6 days ago51 mins समाज की दोहरी मानसिकता, पुरुषों के विरोधाभासी आचरण, दहेज प्रथा और संतान के लिए स्त्री को दोषी ठहराने की परंपरा पर सवाल उठाती यह कविता उस औरत की आवाज़ है, जो लंबे समय तक चुप रहने के बाद अपने भीतर की आग पहचानने लगती है। Read More