दहेज के बोझ से चिंतित बेटी और माता-पिता का भावुक दृश्य

दहेज प्रथा: विवाह संस्कार या सामाजिक व्यापार ?

दहेज प्रथा पर आधारित यह विचारोत्तेजक लेख विवाह जैसे पवित्र संस्कार के बदलते स्वरूप, सामाजिक मानसिकता, आर्थिक दबाव, स्त्रीधन के अधिकार और आधुनिक समाज की वास्तविकताओं पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करता है। यह लेख पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।

Read More

सीता चाहिए, तो राम भी बनो

यह कविता समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, एसिड अटैक, महिलाओं के प्रति हिंसा और दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रश्न उठाती है। साथ ही यह पुरुषों को राम और कृष्ण जैसे आदर्शों का अनुसरण कर नारी सम्मान की रक्षा करने का संदेश देती है।

Read More
बेटी की सफलता और माँ के समर्थन को दर्शाती प्रेरणादायक लघुकथा का दृश्य

सौ सुनार की, एक लोहार की

सौ सुनार की, एक लोहार की!” एक प्रेरणादायक लघुकथा है, जिसमें एक माँ अपनी बेटी के सपनों के साथ खड़ी होती है और बेटी अपनी मेहनत से समाज की सोच को करारा जवाब देती है।

Read More