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Budget 2026 income tax new rules explained no jail penalty only

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बजट

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश किए गए पहले केंद्रीय बजट में केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 में रक्षा के लिए ₹7,84,678 करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के ₹6,81,210 करोड़ के मुकाबले करीब ₹1 लाख करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी है।

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स्वतंत्र और आत्मविश्वासी भारतीय महिला नारी अधिकार और समानता का प्रतीक बनकर खड़ी

मैं नारी हूँ जागीर नहीं

यह कविता नारी की स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और अधिकारों की बुलंद आवाज़ है। समाज में स्त्री को जागीर समझने की मानसिकता पर तीखा प्रहार करती यह रचना समानता और सम्मान की माँग करती है।

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सनम, तुम देना साथ मेरा

यह कविता प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प को दर्शाती है। भारतीय सांस्कृतिक संदर्भों में रची यह रचना स्त्री के समर्पण, स्नेह और भावनात्मक सुरक्षा की आकांक्षा को कोमल शब्दों में व्यक्त करती है।

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जनवरी की धूप में चाय पीते हुए आत्मचिंतन करती महिला, सर्दी और मानवीय संवेदना का दृश्य

धूप, चाय और करुणा: जनवरी की सीख

“मेरी प्यारी जनवरी” एक आत्मीय और भावुक गद्य है, जिसमें सर्दियों की ठंड, धूप की मिठास, नए संकल्पों की शुरुआत और समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदना को बेहद सहज शब्दों में पिरोया गया है।

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बसंत ऋतु में खिले फूलों, कोयल और भँवरे के बीच प्रकृति सौंदर्य निहारती भारतीय ग्रामीण स्त्री

ऋतु बसंत आयो री…

“ऋतु बसंत आयो री” प्रकृति के नवजीवन, प्रेम और उल्लास का काव्यात्मक उत्सव है। शीतल बयार, खिले सुमन, कोयल की कूक और मन के हिलोर के माध्यम से यह कविता बसंत ऋतु की जीवंत अनुभूति कराती है।

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घर की रसोई में साथ खाना बनाते और मुस्कुराते आधुनिक भारतीय कपल, साझा जिम्मेदारियों और कोरमांस की भावना को दर्शाता दृश्य।

रोमांस का बदला हुआ मतलब ” कोरमांस”

आज के दौर में प्यार अब केवल कैंडललाइट डिनर और बड़े सरप्राइज़ तक सीमित नहीं रहा। साझा ज़िम्मेदारियों, रोज़मर्रा के कामों और एक-दूसरे का साथ निभाने में पनपता यह नया ट्रेंड कोरमांस आधुनिक रिश्तों को एक नई, टिकाऊ परिभाषा दे रहा है।

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जीवन, प्रकृति और अनुभूति पर आधारित हिंदी कविता “मैं कविता हूँ” का भावात्मक चित्र

मैं कविता हूँ…

मैं कविता हूँ” केवल शब्दों की रचना नहीं, बल्कि जीवन की अनुभूतियों का स्वीकार है। दुख, सुख, प्रकृति और समय के बीच कविता स्वयं को खोजती और सदा जीवित रहती है।

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कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा नागपुर की मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्प भेंटवार्ता पत्रम से सम्मानित करते हुए

एक मंच, दो पीढ़ियाँ और साहित्य की साझा विरासत

नागपुर की साहित्यकार मेघा अग्रवाल और उनकी पुत्री मिहूं अग्रवाल को कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा एक साथ सम्मानित किया गया। “दो पीढ़ियाँ एक साथ” कार्यक्रम में माँ-पुत्री की यह साहित्यिक यात्रा दर्शकों के लिए प्रेरणा बनी।

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गणतंत्र दिवस पर आर. के. कॉलेज मालाड में आयोजित कथा-कथन कार्यक्रम में साहित्यकार कहानी पाठ करते हुए।

गणतंत्र दिवस पर “कथा-कथन” कार्यक्रम संपन्न

गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कथा-कथन कार्यक्रम में साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिली।

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