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अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर लौटता हुआ जनसमूह, तनी हुई मुट्ठियाँ और संघर्ष का प्रतीकात्मक दृश्य।

वे लौटेंगे..

“वे लौटेंगे” एक प्रभावशाली कविता है जो बिखरे हुए लोगों के फिर से संगठित होकर अन्याय के खिलाफ खड़े होने की उम्मीद को स्वर देती है। यह रचना संघर्ष, एकता और मानवता के बीज बोने की बात करती है। कविता बताती है कि जो लोग दिशाओं में बिखर गए हैं, वे एक दिन फिर लौटेंगे भूख, पीड़ा और अन्याय को मुट्ठी में भींचकर, एक स्वर और एक आवाज़ बनकर।

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सुबह की रोशनी में लकड़ी की मेज पर रखा गर्म चाय का कप, हल्की भाप उठती हुई, पास में चाय की पत्तियां और शांत वातावरण

चाय: एक कप में सेहत, सुकून और लंबी उम्र का राज

चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि सेहत और सुकून का मेल है. सही समय, सही तापमान और सही मात्रा में पी गई चाय दिल, मेटाबॉलिज़्म और इम्युनिटी को मजबूत बनाती है, जबकि गलत आदतें इसके फायदे को नुकसान में बदल सकती हैं. यह लेख बताता है चाय पीने का वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक तरीका.

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शोकाकुल घर में नेत्रदान की प्रक्रिया के बाद श्रद्धांजलि स्वरूप शांत वातावरण, मानवता और परोपकार को दर्शाता भावुक दृश्य।

…जब विदाई ने रोशनी ओढ़ ली

श्रीमती शकुंतला बोहरा के नेत्रदान ने शोक की घड़ी को मानवता के उजाले में बदल दिया। यह भावुक कहानी बताती है कि कैसे एक परिवार ने अपने निजी दुःख को दो अनजान ज़िंदगियों की रोशनी बना दिया और समाज के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की।

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भारत माता का प्रतीकात्मक दृश्य, लहराता तिरंगा, हिमालय, गंगा और विविध धर्मों के लोग एकता के साथ, देशभक्ति हिंदी कविता का भाव।

भारत महान

यह कविता भारत देश की महानता, एकता और सांस्कृतिक विविधता का भावपूर्ण चित्रण है। तिरंगा, गंगा, हिमालय और वीरपुरुषों के गौरवशाली इतिहास के माध्यम से यह रचना भारत माता के प्रति प्रेम, सम्मान और गर्व की भावना को सशक्त शब्द देती है।

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इश्क़ का कारोबार

यह रचना प्रेम, प्रतीक्षा और विरह की गहन अनुभूति को शब्द देती है। दिल में सहेजे प्यार, अख़बार में कैद ख़बरें और आँसुओं से लिखे ख़त ये पंक्तियाँ उस आशिक़ की कथा कहती हैं जो यादों, तन्हाई और ज़ख़्मों के बीच भी इश्क़ को पूरी शिद्दत से संभाले बैठा है।

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बसेरा

‘बसेरा’ एक संवेदनशील लघुकथा है, जिसमें पेड़ और चिड़ियों के संवाद के माध्यम से विकास और विनाश के द्वंद्व को उकेरा गया है। यह कथा प्रकृति, सह-अस्तित्व और मानवीय हस्तक्षेप के कारण उजड़ते आश्रयों की पीड़ा को अत्यंत मार्मिक ढंग से सामने लाती है।

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बस स्टॉप पर खड़ी एक युवती, आँखों में इंतज़ार और होठों पर हल्की मुस्कान, प्रेम और विरह की भावुक हिंदी कविता का दृश्य।

कुछ पलों की कहानी

यह रचना प्रेम, स्मृति और इंतज़ार की मार्मिक कथा है। प्यार में पागल एक लड़की, जो समय के साथ आगे बढ़ गई है, लेकिन वादों की स्मृतियाँ आज भी बस स्टॉप पर खड़ी मिलती हैं। शीशा, काजल, मुस्कान और हर आती बस सब मिलकर अधूरे प्रेम और लौटकर न आने वाले वादे की एक संवेदनशील कविता रचते हैं।

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अजनबी सांवरे से संवाद करती भावनात्मक हिंदी कविता, जिसमें प्रेम, भक्ति और मन की खोज का काव्यात्मक चित्रण है।

ऐ अजनबी सांवरे

यह कविता प्रेम, पहचान और आत्मिक संवाद की कोमल अभिव्यक्ति है। ‘अजनबी’ और ‘सांवरे’ के प्रतीकों के माध्यम से कवि मन की उस यात्रा को शब्द देता है, जहाँ नादानी, तलाश और समर्पण एक-दूसरे में घुल जाते हैं। प्रेम यहाँ केवल सांसारिक नहीं, बल्कि भक्ति और आत्मा का स्वर बन जाता है। मन की भटकन, चित की चोरी और ऋतु प्रीत की सुगंध के साथ यह रचना पाठक को भीतर तक छूती है और उसे अपने ही भावलोक में ले जाती है।

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उज्जैन में वंदे मातरम् कार्यक्रम में मंच पर विनय पत्राले और अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ भारत भारती और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के सदस्य

वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है : विनय पत्राले

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में श्री विनय पत्राले ने कहा कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। कार्यक्रम में सरदार पटेल के योगदान, राष्ट्रगीत और देशभक्ति पर विचार साझा किए गए।

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श्मशान से लौटती साँसें…

श्मशान की राख से लौटकर जब ज़िंदगी की जिम्मेदारियाँ बाँहों में भर ली जाती हैं—तब यह कविता मृत्यु से आँख मिलाकर जीवन को चुनने का साहस बन जाती है।

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