मन के भाव..

न के भीतर जन्म लेने वाले भाव ही रचना का आधार बनते हैं। रचनाकार हो, कलाकार हो या चित्रकार—हर सृजन उसी सूक्ष्म अनुभूति से आकार पाता है, जो मन में आहिस्ता से जन्म लेती है।
प्रकृति और परमात्मा ने इस सृष्टि में संतुलन रचा, पर जब मनुष्य अपने ही खुमार और कामना में डूब जाता है, तो यही संतुलन टूटने लगता है। जल, वायु और धरती का दूषित होना किसी बाहरी शत्रु की नहीं, बल्कि मानव की अपनी भूल की कहानी है।

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एक व्यक्ति शांत वातावरण में डायरी लिखते हुए, मन की गहराई को व्यक्त करता हुआ

मन की कही

“मन की कही” एक भावनात्मक और आत्मचिंतन से भरी हिंदी रचना है, जो मन की उन अनकही बातों को व्यक्त करती है जिन्हें हर किसी से साझा नहीं किया जा सकता। यह लेख विश्वास, आत्मीयता और मौन के महत्व को उजागर करता है, और बताता है कि क्यों हर दिल हमारे रहस्यों का भार नहीं उठा सकता। अंत में यह संदेश देता है कि एक पुस्तक ही सबसे सच्ची और निस्संदेह साथी बन सकती है।

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एक भारतीय परिवार का भावनात्मक दृश्य जिसमें दादा-दादी, माता-पिता और एक बेटी पारंपरिक माहौल में साथ खड़े हैं; बेटी आदरपूर्वक बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर रही है, घर में स्नेह, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का वातावरण दिखाई दे रहा है।

रिवाज़ और रिश्तों की रखवाली

यह कविता रिश्तों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों की गहराई को दर्शाती है, जिसमें बुज़ुर्गों का सम्मान, बेटियों की सुरक्षा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का सुंदर संदेश दिया गया है।

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माँ विंध्यवासिनी की सुंदर प्रतिमा, लाल चुनरी और स्वर्ण आभूषणों से सजी हुई, नवरात्रि पूजा का दृश्य

विंध्यवासिनी माता

विंध्यवासिनी माता को समर्पित यह भक्ति कविता भक्तों की आस्था, श्रद्धा और समर्पण को दर्शाती है। इसमें माता के श्रृंगार, छप्पन भोग, नवरात्रि उत्सव और भक्तों की भावनाओं का सुंदर चित्रण किया गया है। यह कविता नवरात्रि के पावन अवसर पर पढ़ने योग्य एक उत्कृष्ट रचना है।

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सच में वही दीपावली होगी

ज्योति सोनी “वैदेही ” अलवर ,राजस्थान दीपावली, अंधेरे रूपी शत्रु के विरोध में सैकड़ों दियों की क्रांति का त्यौहार है। किस तरह नन्हे-नन्हे दिए, अपने साहस को समेटकर पूरी शक्ति और हिम्मत से उस अंधेरे को चीरते हुए धीरे-धीरे जलते हैं, जिसने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है। उस कमजोर सी बाती में कितनी…

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आँखों की ख़ामोशी

इन आँखों की ख़ामोशी में एक दबी हुई रागिनी है अनकहे शब्दों की, आधी छूटी कहानियों की। चेहरे पर ठहरी शांति और निगाहों में उठते-गिरते समंदर के बीच एक गहरा मंथन छुपा है। ये आँखें जैसे हर सवाल का जवाब अपने भीतर समेटे बैठी हों, मानो कह रही हों कि उन्होंने बहुत कुछ देखा है… पर कहने के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है।

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जीवन एक संगीत

जीवन एक मधुर संगीत की तरह है, जिसमें सुख और दुःख उसके स्वरों की भाँति आते-जाते रहते हैं। संयम, विश्वास और परहित की भावना से भरा यह जीवन, गीता के ज्ञान को आत्मसात कर हर भव से पार हो सकता है। जब मन ईर्ष्या और लोभ से मुक्त होकर आशा, ममता और सत्य को अपनाता है, तब जीवन स्वयं एक संगीतमय चमन बन जाता है।

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ग़ज़ल

यह बात ज़ात-पात की नहीं, सोच और नज़रिया की है।हर बात की तह में जाने की आदत कभी फ़ायदा देती है, कभी सुकरात की तरह जान भी ले लेती है।
चींटी की कहानी सिखाती है कि औक़ात जानकर, शांत रहकर आगे बढ़ना ही बुद्धिमानी है। बच्चों को भी यही समझ देना चाहिए कि हर अनजानी बात पर भरोसा न करें।

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जीवन के विभिन्न भावनात्मक रंगों को दर्शाता होली का दृश्य

रंगों से सजी ज़िंदगी

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद रंग ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।जीवन में हर रंग अपनी अहमियत दर्ज कराने समय-समय पर चला आता है। अमूमन हम नीले, पीले, हरे और सबसे पुराने रंगगुलाबी के बारे में जानते हैं। रंग ज़िंदगी में हों या शब्दों में… वे खुद को बयां कर ही देते हैं। आइए जानते हैं,…

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