धरती का उजाला, आसमान से मिला तोहफ़ा : सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि पृथ्वी के भविष्य की रक्षा का संकल्प है। जब हम सूर्य की किरणों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं, तो न सिर्फ़ प्रदूषण घटाते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण भी सुरक्षित करते हैं। गाँवों से लेकर शहरों तक सौर पैनलों की चमक आज विकास की नई दिशा दिखा रही है। यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत—तीनों का अद्भुत संगम है।

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हिंदी में हँसी, हिंदी में प्यार

आज हिंदी दिवस पर सबको याद दिलाएँ – अंग्रेज़ी नहीं, अपनी प्यारी हिंदी बोलें! बात करें, हँसी-मज़ाक करें और इसे दिल से अपनाएँ। क्योंकि हिंदी है हमारी भाषा, हमारी पहचान।”

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साइकिल, सपने और मिल रोड

नौवीं कक्षा में प्रवेश से पहले साइकिल सीखने का सपना हर छोटे शहर के बच्चे की तरह लेखक के मन में भी पलता रहा। पैसों की कमी, उधारी की सीमाएँ और जुगाड़ के सहारे मिली एक खटारा साइकिल गिरते-पड़ते सीखने की कोशिश और अंत में हुई “क्रैश लैंडिंग” इस कहानी को मासूम बचपन की यादों से भर देती है।

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जरूरी

दामोदर ने कहा, “शहर में तीन दिन से कर्फ्यू था। आज हटते ही दो सौ रुपए की मजदूरी हुई। कल बाबा का श्राद्ध है, कुछ किराना ले आता हूँ।”
पत्नी ने चिंता जताई, “अम्मा की तबियत देख लो, पांच बार उल्टी की और बुखार भी तेज है।”
दामोदर ने पूछा, “फिर क्या करूँ?”
पत्नी ने कहा, “नुक्कड़ वाले डॉक्टर साहब के पास चलो। इलाज जरूरी है।”दामोदर ने मान लिया, “हाँ, सही है। पहले अम्मा का इलाज।”

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पुलवामा के बाद की एक माँ की कश्मीर डायरी

यह एक माँ की हिम्मत, आत्मविश्वास और अनुभवों की कहानी है — जो अपने दो बच्चों के साथ अकेले कश्मीर की वादियों में निकल पड़ी। पुलवामा की घटना के बाद जब डर और संदेह ने मन को जकड़ रखा था, तब भी उसने फैसला किया कि ज़िंदगी के इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देगी। डर के उस पार फैली थी बर्फ़ से ढकी पहाड़ों की शांति, मेहमाननवाज़ लोगों का अपनापन और एक माँ के दिल में दर्ज़ हो गई यादों की चमक।

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शिव की शिवा 

सम्पूर्ण वातावरण ढोल, ढाक और ताशों की लयबद्ध ध्वनि से गूँज रहा था। घर-घर से दुर्गा स्तोत्र और आरती के साथ शंख और घंटियों की आवाज़ें आ रही थीं। शारदीय नवरात्र और देवी दुर्गा मइया की भक्ति में शहर डूबा था।नौमी की संध्या-आरती के बाद मालकिन ने फलाहार किया और रेशमा को भी खाने दिया। रेशमा, जिसे बचपन से मालकिन ने गोद में रखा और नाम दिया था, उनकी हर बात और हर काम का अनुसरण करती थी।
शरद की ठंडी रात में, मालकिन ने खिड़की से देखा कि एक लड़की बेतहाशा भाग रही है — पीछे दो-तीन गुंडे उसका पीछा कर रहे थे। लड़की की पीठ और बाँह घायल थी। मालकिन तुरंत देवी माँ से प्रार्थना करती हुई उसके पीछे दौड़ीं।

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कागज़ की कश्ती

कविता बचपन की उन मीठी यादों को जीवंत करती है जब बारिश में “कागज़ की कश्ती” सपनों का प्रतीक बन जाती थी। न चिंता थी, न भय—बस मासूमियत और आनंद था। अब वक्त बदल गया है; बारिश, दोस्त और वो बचपन सब पीछे छूट गए हैं। “कागज़ की कश्ती” आज सिर्फ उन सुनहरे दिनों की प्यारी याद बनकर रह गई है।

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एक भारतीय महिला शांत भाव से आकाश की ओर देखती हुई, चेहरे पर प्रेम और संतोष की चमक, आध्यात्मिक मिलन और आंतरिक खुशी का प्रतीक

“मुझे मिल गया मन का मीत”

“मुझे मिल गया मन का मीत” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की गहराई को सुंदर शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह कविता एक ऐसे मिलन की अनुभूति कराती है, जहाँ मन को सच्चा साथी मिलता है और जीवन संगीत से भर उठता है। नारी-मन की संवेदनाओं, प्रतीक्षा और पूर्णता का यह काव्यात्मक चित्रण पाठकों को भाव-विभोर कर देता है।

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हथकड़ी पहनी एक बुजुर्ग महिला पुलिस के साथ भीड़ के बीच खड़ी है, चेहरे पर कठोर भाव और पीछे पुरानी गली में जुटे लोग, जो एक दर्दनाक अतीत और प्रतिशोध की कहानी को दर्शाता है।

थरथराता सच

रश्मि लहर, लखनऊ सोना धूप में बैठकर अपने लंबे बालों को सुखा रही थी। उसके बाल उसके व्यक्तित्व का प्रभावशाली हिस्सा थे। वह अपनी बड़ी-बड़ी तथा मासूमियत से भरी ऑंखों को बंद करके धूप का आनंद ले रही थी। जाड़ों में पुराने लखनऊ की छतों पर अलग ही रौनक होती है। सोना को यह सोचकर…

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अहसासों के कतरन…

हम अपने आप में बस एक पानी की बूँद जैसे हैं। कभी मिट्टी पर गिरकर उसमें समा जाते हैं, तो कभी किसी पत्ते पर टिककर उसकी शोभा बढ़ाते हैं। और जब लहरों से मिलते हैं, तो खुद सागर का रूप ले लेते हैं। हमारी पहचान इस पर नहीं है कि हम कौन हैं, बल्कि इस पर है कि हम किससे जुड़ते हैं।

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