ये कैसा सवाल
गरीबी और मजबूरी के बीच पला-बढ़ा एक छोटा सा बच्चा, जब जीवन की सच्चाई को करीब से देखता है, तो उसके भीतर एक बड़ा बदलाव जन्म लेता है। यह कहानी आठ वर्षीय भानु और उसकी मजदूर माँ रमिया की है, जो रोज़मर्रा की कठिनाइयों के बीच भी अपने बेटे के बेहतर भविष्य का सपना देखती है।
आइना पूछता है…
आइना अब मुझसे पूछता है कि मैं कौन हूँ, किसकी तस्वीर हूँ। मेरा चेहरा तो सामने है, लेकिन मेरी परछाईं में किसी और की तासीर बसती है। पलकों पर ठहरे मौसम और होठों पर आधी मुस्कान—यह सब उसने छोड़ा था, शायद किसी अनकहे ग़म की पहचान के तौर पर। हर दिन सवेरा आता है, लेकिन उजियारा अधूरा-सा लगता है। रास्ते वही हैं, कदम वही हैं, पर मन अब पूरा नहीं लगता। मेरे भीतर यादों का एक घर है, जहाँ खामोशियाँ अपनी भाषा में बोलती हैं। जब मैं आइने में खुद को देखता हूँ, तो लगता है कि वह अब भी मुझमें कहीं डोलती हैं। शायद इसी वजह से आइना एक दिन डर गया—कैसे दिखाए वो सूरत, जो अब किसी और के असर में जी रही है।
त्रिमूर्ति हाई स्कूल में गूंजा देशभक्ति का स्वर
त्रिमूर्ति हाई स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह उत्साह और देशभक्ति के साथ आयोजित हुआ. विद्यार्थियों ने गीत, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया.
जिंदगी का सच
हार और जीत, सुख और दुख, प्रेम और घृणा—जिंदगी इन सभी भावों का संगम है। यह कविता जीवन के इसी सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है और हमें सिखाती है कि कर्म, सरलता और परमार्थ के मार्ग पर चलकर ही जीवन के पलों को सार्थक बनाया जा सकता है।
सूरज ओढ़े रजाई
यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.
सोना-चांदी ने बनाया नया इतिहास
सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज यानी 29 दिसंबर को लगातार पांचवें कारोबारी दिन दोनों कीमती धातुएं अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 205 रुपये की बढ़त के साथ 1,38,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। इससे पहले सोने का भाव 1,37,956 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
खामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं…
पोते रवि के लौटने से श्याम बाबू की सूनी जिंदगी में खुशियाँ लौट आती हैं, लेकिन पुराने घर की दीवारें उन्हें उस बेटे मोहन की याद दिलाती हैं, जिसका आज भी इंतजार है।
एक लेखिका, एक मार्गदर्शक: विजया डालमिया
विजया डालमिया का जीवन साहित्य, समाज सेवा और पारिवारिक मूल्यों का अद्भुत संगम है, जो हर किसी को प्रेरित करता है।
लक्ष्मी : एक आवाज़ जो बदल रही है सोच
देहरादून की शांत वादियों से उठी एक आवाज़ आज समाज की सोच को चुनौती दे रही है. यह कहानी है लक्ष्मी कीभारत की पहली सर्टिफाइड दृष्टि दिव्यांग (विजुअली इम्पेयर्ड) रेडियो जॉकी, जिन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज के स्थापित पूर्वाग्रहों को भी तोड़ने का साहस दिखाया.
