आँखों की ख़ामोशी

इन आँखों की ख़ामोशी में एक दबी हुई रागिनी है अनकहे शब्दों की, आधी छूटी कहानियों की। चेहरे पर ठहरी शांति और निगाहों में उठते-गिरते समंदर के बीच एक गहरा मंथन छुपा है। ये आँखें जैसे हर सवाल का जवाब अपने भीतर समेटे बैठी हों, मानो कह रही हों कि उन्होंने बहुत कुछ देखा है… पर कहने के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है।

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सुर संगम साथ मिले

कविता मानवीय हृदय की उन गहरी इच्छाओं को प्रकट करती है जो भौतिक सुख-संपदा से परे, आत्मिक शांति और सच्चे प्रेम की खोज में हैं। कवि ने “प्रारम्भी नेह” में जीवन को एक ऐसे वन के रूप में देखा है जहाँ वह चंदन जैसी सुगंध और गुलशन जैसी सुंदरता चाहता है, परंतु उसे एहसास है कि धन और वैभव उसके साथ नहीं रहेंगे। इसलिए वह जीवन में सुर-संगम अर्थात् आत्मिक सामंजस्य की चाह रखता है।

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दो भारतीय महिलाओं के बीच अविश्वास और भावनात्मक दूरी को दर्शाता यथार्थवादी दृश्य, टूटा भरोसा और रिश्तों की खामोशी।

खामोशी

वर्षों पुरानी दोस्ती एक सवाल के सामने टूटने लगी—“क्या आपने मेरा सामान देखा था?” शक की उस छोटी-सी दरार ने भरोसे को खामोशी में बदल दिया। यह कहानी रिश्तों में अविश्वास, भावनात्मक दूरी और उन अनकहे दर्दों की है जो लंबे समय तक भीतर रह जाते हैं।

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एक दिव्य दृश्य में एक ओर बाँसुरी बजाते भगवान कृष्ण और दूसरी ओर खंभे से प्रकट होते भगवान नृसिंह, प्रेम और शक्ति के दो रूप दर्शाते हुए।

मोहन से महाकालः कृष्ण और नृसिंह

“मोहन से महाकालः कृष्ण और नृसिंह” एक प्रभावशाली भक्ति कविता है, जो भगवान विष्णु के दो महान अवतारों श्रीकृष्ण और भगवान नृसिंह का सुंदर चित्रण करती है। एक ओर श्रीकृष्ण प्रेम, करुणा और गीता ज्ञान के प्रतीक हैं, तो दूसरी ओर नृसिंह अधर्म के विनाश और भक्त रक्षा के प्रतीक हैं। कविता बताती है कि ईश्वर समय और परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग रूप धारण करते हैं। यह रचना भक्ति, शक्ति और धर्म रक्षा का अद्भुत संदेश देती है, जो पाठकों के मन में श्रद्धा और उत्साह भर देती है।

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A middle aged Indian man experiencing mild chest discomfort and fatigue at home, unaware of silent heart attack symptoms, realistic scene

डॉ. प्रभु चौधरी के निधन से साइलेंट अटैक पर बढ़ी चिंता

बढ़ते साइलेंट अटैक के मामलों ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। बिना स्पष्ट लक्षण के होने वाला यह हार्ट अटैक खतरनाक हो सकता है, लेकिन सही जानकारी, नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इससे बचाव संभव है।

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ख़त अपने नाम…

आज का खयाल सीधा दिल को छू गया—क्यों न खुद से ही अपनी कीमत पूछी जाए, बजाय दूसरों की नज़रों में ढूँढ़ने के। क्यों न एक ख़त खुद को लिखा जाए, जिसमें अपने ही बचपन की हँसी, अपनी ही रंगीन तितली-सी चंचलता, और अपनी ही खुशबू को फिर से महसूस किया जाए। जीवन की भाग-दौड़ में खोकर हम खुद को सँवारना भूल जाते हैं, लेकिन जब खुद से मुलाक़ात होती है, तो एहसास होता है कि सबसे बड़ा ख़िताब, सबसे सुंदर परिभाषा, हमेशा से हमारे अपने ही नाम थी।

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मुशायरा ‘जश्न-ए-हिंदुस्तान’ का सफल आयोजन

अखिल भारतीय हिंदी उर्दू एकता अंजुमन’ संस्था द्वारा बाहरी दिल्ली के नांगलोई इलाके में एक शानदार मुशायरा और कवि सम्मेलन (एक शाम एहतराम सिद्दीकी के नाम) का आयोजन सुरभि स्टूडियो में किया गया। इसकी सदारत मशहूर शायर ख़ुमार देहलवी साहब ने की। मुख्य अतिथि फहीम जोगापुरी, अनिल मीत और अनस फैज़ी रहे।
मुशायरे का आगाज़ ताबिश खेराबादी ने ‘नात-ए-पाक’ से किया। निज़ामत असलम बेताब ने बेहद खूबसूरत अंदाज़ में निभाई। इस मुशायरे में दिल्ली और इसके आसपास के शहरों से आए लगभग 35 शायरों और शायरा ने शिरकत की और अपने-अपने कलाम पेश किए, जिन्हें वहाँ मौजूद श्रोताओं ने खूब सराहा।

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मुंबई – रत्नागिरी के बीच 6 अतिरिक्त होली

होली के अवसर पर यात्रियों की सुविधा के लिए पनवेल–रत्नागिरी के बीच 6 अनारक्षित मेमू विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी. साथ ही दिवा–चिपलून स्पेशल की तिथियों में बदलाव किया गया है. रेलवे ने यात्रियों से संशोधित समय सारणी की जानकारी लेने की अपील की है.

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कड़ी धूप में काम करती एक भारतीय मजदूर महिला, चेहरे पर थकान और उम्मीद, पीछे पढ़ते बच्चे, दो वक्त की रोटी के संघर्ष का भावुक दृश्य।

रोटी दो जून की

अर्पणा सिंह “अर्पी” , रांची बड़ी मुश्किलों से मिल पाती है निजात,मज़दूरों को पाने में रोटी दो जून की सौगात। बैशाख की दोपहरी की धूप या बहती लू,पसीने से लथपथ हो या हो तपती भू।तन ढकने को वसन और मिटाने को भूख,इसी की आपूर्ति में रहते हैं हर पल मशगूल। बड़ी मुश्किलों से मिल पाती…

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छप्पन भोग और खाटू श्याम दरबार ने बांधा श्रद्धालुओं का मन

श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस का आयोजन आज अत्यंत भक्तिमय, उल्लासपूर्ण और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से गुंजायमान रहा। हर ओर “श्रीकृष्ण” नाम का संकीर्तन, भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि और श्रद्धा की तरंगें वातावरण को पावन बना रही थीं।

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