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पंचक: शुभ-अशुभ का रहस्य और धार्मिक महत्व

पंचक वह समय होता है जब चंद्रमा पाँच विशेष नक्षत्रों में रहता है और इस अवधि को हिंदू धर्म में अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यह काल विभिन्न प्रकार का होता है—जैसे रोग पंचक, राज पंचक, अग्नि पंचक आदि—जिनमें कुछ कार्यों को करना वर्जित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय सावधानी बरतकर जीवन की अनेक परेशानियों से बचा जा सकता है।”

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आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव से दूर परिवार के साथ समय बिताता व्यक्ति

दौड़ते-दौड़ते कहीं ज़िंदगी पीछे न छूट जाए

प्रतिस्पर्धा, पैसा कमाने की होड़ और डिजिटल दुनिया ने इंसान को अपनों से दूर कर दिया है. ऐसे में जरूरी है कि हम भागती जिंदगी से थोड़ा वक्त निकालें, रिश्तों को समय दें और तनाव के बजाय सुकून को चुनें.

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सोशल मीडिया पर नए रिश्ते की तस्वीर साझा करते युवा भारतीय जोड़े का दृश्य

प्यार छिपाना नहीं, धीरे-धीरे बताना

सोशल मीडिया के दौर में रिश्तों को जाहिर करने का अंदाज भी बदल गया है। कोई अपने साथी की मौजूदगी के छोटे-छोटे संकेत देता है तो कोई रिश्ते को खुलकर स्वीकार करता है। जानिए इस बदलते चलन के पीछे की वजह।

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लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के दौरान बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को सम्मानित करते हुए अतिथि

नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल सम्मानित

लखनऊ में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक प्रतिभा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।

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कोई लौटा दे मेरे… वो स्कूल के दिन!

पैदल स्कूल जाना, बिना ट्यूशन के पढ़ाई, सादगी भरा जीवन और माता-पिता की निश्चिंतता। सुविधाओं की कमी के बावजूद उस दौर में संतोष, आत्मनिर्भरता और खुशियों की भरपूर अनुभूति थी, जो आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में दुर्लभ हो गई है।

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स्टेशन पर तुलेगा सामान, एक्स्ट्रा लगेज पर ज्यादा किराया

अब रेल यात्रा के दौरान अतिरिक्त सामान ले जाना महंगा पड़ सकता है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार, 17 दिसंबर को लोकसभा में स्पष्ट किया कि ट्रेन में तय सीमा से अधिक सामान ले जाने पर यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

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हरसिंगार: वह फूल जो गिरकर भी महकना नहीं छोड़ता |

हरसिंगार: वह फूल जो गिरकर भी महकना नहीं छोड़ता

रात में खिलने और सुबह धरती पर बिखर जाने वाला हरसिंगार केवल एक फूल नहीं, बल्कि जीवन का गहरा संदेश है। यह सिखाता है कि जीवन की सुंदरता उसकी अवधि में नहीं, बल्कि उसके द्वारा छोड़ी गई खुशबू और प्रभाव में होती है।

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जब तक शिष्टाचार जीवित, समाज भी जीवित

Give and Take की थ्योरी एक सरल लेकिन गहराई से भरी जीवन-दृष्टि है, जो न सिर्फ हमारे व्यक्तिगत संबंधों को परिभाषित करती है, बल्कि हमारे सामाजिक और पेशेवर जीवन में भी अहम भूमिका निभाती है। फिर चाहे वह मान – सम्मान,स्नेह हो या नफ़रत …..।
वैसे तो आज के समय में यदि हम अपने चारों ओर नज़र डालें, तो एक स्पष्ट और चिंताजनक परिवर्तन दिखाई देता है — शिष्टाचार की कमी। वह विनम्रता, वह ‘कृपया’, ‘धन्यवाद’, और ‘माफ कीजिए’ जैसे शब्द अब धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं। एक समय था जब बड़ों का सम्मान, छोटों पर स्नेह, और अजनबियों के प्रति भी आदर का भाव समाज की आत्मा हुआ करता था।

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हिंदी दिवस: मातृभाषा की मौन पीड़ा

हिंदी मेरी कविता के भाल की बिंदी है, जिसने हर प्रसंग में मेरा साथ निभाया और सहज-सरल भाषा से मेरे गीतों को ढाल दिया। लेकिन यह पीड़ा भी साथ है कि अंग्रेज़ों से मिली आज़ादी के बाद भी हम अंग्रेज़ी के ग़ुलाम बने बैठे हैं। मातृभाषा की दुर्दशा देखकर दिल रो उठता है। हिंदी मस्तक की अट्टालिका से औंधे मुँह गिरती दिखाई देती है और अंतर्मन चीत्कार कर उठता है कि जिस देश को अथाह परिश्रम से आज़ादी मिली, वहाँ हिंदी का तिरस्कार क्यों? यह कैसी विडंबना और कैसी बर्बादी है!

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महिला दिवस पर विचारों और आत्मविश्वास को दर्शाती प्रेरक हिंदी कविता

जब विचारों से पहचान बनने लगे

यह प्रेरक महिला दिवस कविता बताती है कि असली सशक्तिकरण बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि विचारों, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता में है। जब स्त्री अपनी पहचान खुद तय करने लगे और जीवन को संभावनाओं के विस्तार की तरह जीने लगे, तभी महिला दिवस सार्थक होता है।

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