हिंदी और साहित्य में करियर की नई दिशाएँ: राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
उज्जैन। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला एवं ललित कला अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी हिंदी भाषा और साहित्य में करियर की नई दिशाएँ विषय पर केंद्रित थी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वक्ता नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार…
शीघ्र दर्शन से दो माह में महाकाल को 24.24 करोड़
श्री महाकालेश्वर मंदिर में 250 रुपये की शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मई-जून में 24 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है। सावन-भादौ में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए महाकाल महालोक में 11 करोड़ रुपये की लागत से शेड, नई कतार व्यवस्था, क्यूआर आधारित बैरियर्स और ऑनलाइन अन्नदान सुविधा जैसी व्यवस्थाएं शुरू की जा रही हैं।
Gold Silver Price Today: सोना 1200 रुपये तक सस्ता, चांदी में भी गिरावट
सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली. एमसीएक्स पर सोना करीब 1200 रुपये तक सस्ता हुआ, जबकि चांदी में भी कमजोरी दर्ज की गई. जानें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और अन्य शहरों में आज 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने का ताजा भाव.
सुहाग पर्व करवा चौथ
यह कविता भारतीय विवाहिता की भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है। माता-पिता से विदा होकर नए घर में प्रवेश, पति के प्रति समर्पण और सुहागन होने का गौरव इसमें प्रमुख हैं। सोलह श्रृंगार, लाल चुनरी, मांग टीका, मेहंदी, पायल, चूड़ियाँ और मंगलसूत्र जैसे आभूषण उसकी पारंपरिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान को उजागर करते हैं। कविता में करवाचौथ व्रत और चौथ माता से अखंड सुहाग की कामना का भी उल्लेख है। यह अंश स्त्री के नए गृह जीवन, आशाओं और प्रेम भरे संबंधों की महत्ता को भावपूर्ण रूप से व्यक्त करता है।
इंद्रधनुष सा प्रेम
यह कविता प्रेम की उस गहराई को व्यक्त करती है, जो केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन के हर दर्द को सहेजकर उसे सुकून में बदल देती है। प्रिय का साथ मानो सावन की पहली बारिश की तरह है, जो तपती हुई धरती यानी थके हुए मनको ठंडक और नई ऊर्जा देता है।
जन्मदिन की सौगात
यह बाल कविता जन्मदिन के उत्सव को केवल केक और उपहारों तक सीमित न रखकर, उसे संस्कार, सेवा और करुणा से जोड़ती है। पेड़ लगाना, पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, बड़ों का सम्मान और सादगीपूर्ण जीवन जैसे मूल्य इस रचना को बच्चों के लिए शिक्षाप्रद और प्रेरक बनाते हैं।
सर्टिफिकेट
सिर्फ़ शादी होना सर्टिफिकेट नहीं होता, माँ!” — अनीता की ये बात एक सशक्त सामाजिक सवाल खड़ा करती है: क्या एक स्त्री की स्वतंत्रता और निर्णय का मापदंड सिर्फ विवाह होना चाहिए?
माँ का स्वरूप
माँ के दिव्य स्वरूप और मातृत्व, शक्ति, और ममता की अनुभूति का सुंदर चित्रण करती है। इसमें कवि माँ को आकाश सा विशाल हृदय और धरती का धीरज रखने वाली मानते हैं, जो बिना मांगे सब देती हैं और हर समय अपने भक्तों के साथ रहती हैं। कवि माँ से सुख-दुख में साथ रहने, हर सांस में उनका आशीर्वाद पाने और जीवन में उनके दर्शन करने की प्रार्थना करता है। यह कविता भक्ति, श्रद्धा और आत्मीय स्नेह का प्रतीक है, जो माँ की महिमा और उसके संरक्षण की भावना को उजागर करती है।
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