
उषा शर्मा , जामनगर गुजरात
मात-पिता का बिसारकर घर आंगन,नारी अंलकरणों को समेटे,
तेरी अर्धांगिनी बन आई हूँ, पिया मै तेरी सुहागन कहलाई हूँ….!
सिर ओढ़े लाल चुनरी लाज,माथे मांग टीका सजाये आशाओं का,
जीवन में नये रिश्तों की रचाकर महकती गहरी मेहन्दी हाथों सजे
माथे चंदा सी लाल दमकती ये बिंदिया,भाग्य सिंदूरी मांग भरे,
अंगुलियों में समस्त समर्पित भावों भरी ये प्रीत की अंगूठी पहन.
कलाइयों में खनकती ये सुहाग की लाल – हरी चूड़ियाँ पहने ,
नाक में झूमती नथनी,अपनों का नेह बांधकर लाई मैं पहन…
पहने पावन मंगलसूत्र गले, कानों में झुमकों की मधुर झंकार,
नया घर महकाने अब, बालों में महकता उम्मीदों भरा किया श्रृंगार!
करूणा का सुरमयी काजल लगा अपनी चमकती आँखों में,
वाणी में मिठास लिए, दमकती मुख आभा में तुझे पूर्ण करने..
कमर खनकती कोंधनी, सौम्य शालीन व्यवहार प्यार संग करने,
नये बनते रिश्तों को संवारकर सदा अपने जीवन में सहेजने..
पैरों में उमंगों की पायल बिछिया पहन,लगा आलता की लाली,
जीवन में झंकृत कर उजियारा, उषा की भोर किरण बन आली।
अलौकिक पिया ये सोलह श्रृंगार किए, पूर्ण समर्पण भाव से,
जीवन पथ पर तुझ संग जीवनसाथी सुंदर घर संसार बसाने
करवाचौथ पावन पर्व,श्रद्धा भाव श्रृंगारित निर्जल उपवास रख,
चौथ माता से सदा सदा तेरी अर्धांगिनी रहना पिय मांग आई हूँ।
एक दूजे के जन्मोंजन्म सच्चे संगी बने, हृदय में कामना लिए
चाँद को दे अर्घ्य,चौथ माँ से अखण्ड सुहाग आशीर्वाद पाई हूँ।

सजीव चित्रण।
जी बेहद शुक्रिया आपका
आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, इसी तरह आपका स्नेह बना रहे
– सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, इसी तरह आपका स्नेह बना रहे
– सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे