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खामोश चीख और मां का विश्वास

शुरू शुरू में मुझे विवेक सर से बहुत डर लगता था लेकिन धीरे-धीरे मुझे उनके स्पर्श की आदत हो गई और मैं उनके साथ सहज होने लगी थी, मुझे नहीं पता कि वह स्पर्श मुझे अच्छा लगता था या बुरा लगता था ? मां को बताना चाहती थी पर डरती थी , सोचती थी मां पापा मेरे बारे में क्या सोचेंगे ….. क्या विवेक सर मुझे प्यार करते हैं ? …… कैसा प्यार है यह ?

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यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग, हॉफ टिकट और टिकट कलेक्शन के अनुभवों को यादगार अंदाज में पेश करता है। यात्रा और रेलवे से जुड़ी यादें, nostalgically बयान की गई हैं।

हॉफ टिकट : यादों का स़फर

यह लेख पुराने जमाने की रेलवे टिकटिंग और हॉफ टिकट के अनुभवों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। कैसे कार्डबोर्ड टिकट, तेज आवाज़ वाली मशीन और टिकट कलेक्शन का खेल यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की यादों में आज भी खास जगह रखता है, इसे विस्तार से बताया गया है।

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लव यू….टेक केयर

शायद तुम्हें लगता है… मैं मज़ाक करता हूँ, छेड़ता हूँ… पर सच्चाई ये है… मैं खुद को तुम्हारे शब्दों में सहेज कर रखता हूँ। मैं तुम्हारे दोस्त में माँ की ममता पाता हूँ, बहन की फिक्र पाता हूँ… और दिल के किसी सबसे कोमल कोने में एक ऐसी प्रेमिका का एहसास करता हूँ… जो कभी मिली नहीं, पर हमेशा पास रही।”

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“कभी खुद के लिए भी जी ले माँ…”

जाने हमेशा ऐसा क्यों लगता है सारे असंभव काम आप ही कर सकती हो… जादुई सी बेतरतीब से बंधे माँ के जूडे से हमेशा बाल की एक पतली सी लट छूट जाया करती थी, जो पसीने से गर्दन में चिपकी रहती। इतनी गर्मी में रोटियां बनाते हुए माँ पसीने से नहा उठती। सब काम निपटा…

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बारिश के बीच खिड़की के पास बैठी उदास युवती और मोबाइल हाथ में लिए बेचैन युवक—दो दिन की खामोशी के बाद फिर से जुड़ते प्रेम की भावनात्मक झलक।

रूठी धड़कन…

एक अनजाने शब्द ने रिद्धिमा का दिल दुखा दिया। दो दिन की खामोशी ने राघव को एहसास कराया कि सच्चे रिश्ते अहंकार से नहीं, संवाद से बचते हैं। पढ़िए दिल छू लेने वाली प्रेम कहानी।

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माँ जैसी नहीं हूं मैं…

यह कविता एक आत्मस्वीकृति है — एक बेटी की अपनी माँ के प्रति संवेदनाओं, निरीक्षणों और अनुभवों की गहराई से उपजी भावनाओं की अभिव्यक्ति। वह कहती है कि वह अपनी माँ की खामोशी पढ़ लिया करती थी, माँ के संघर्षों और त्याग की साक्षी रही है। माँ की आँखों में छिपे दर्द, जीवन की कठोर सच्चाइयों से संघर्ष, और अपनी इच्छाओं को निस्वार्थ भाव से दबा देने का दृश्य उसने बार-बार देखा।

वह माँ की हर वह चुप्पी पहचानती थी, जिसे दुनिया अनदेखा कर देती है। माँ के आँचल से आँसू पोछने से लेकर, चाँदनी रातों में अपने दुखों से बात करने तक की हर एक लम्हा, बेटी के मन में गहरे बैठ गया।

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सीधा सा गणित: बहू और ससुर के रिश्ते की भावुक हिंदी कहानी

सीधा सा गणित

‘सीधा सा गणित’ एक मार्मिक पारिवारिक कहानी है, जिसमें बहू के परिश्रम को अनदेखा कर दिया जाता है, लेकिन ससुर के स्नेहपूर्ण व्यवहार से रिश्तों की असली गरिमा सामने आती है। यह कहानी परिवार, सम्मान और प्रेम का सुंदर संदेश देती है।

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दरिया और किनारा

कविता में दरिया को जीवन के संघर्ष और पवित्रता का प्रतीक बनाया गया है। दरिया मस्ती और ऊर्जा के साथ बढ़ती है, अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को पार करती है, किनारों से संबंध बनाए रखती है और दूसरों के कष्ट और पापों को समेटती है। यह अपने गंतव्य की ओर दृढ़ता और गति से बढ़ती है, अंततः समुद्र की विशाल बाहों में विलीन होकर अपने सफर का निष्कर्ष प्राप्त करती है। यह कविता दर्शाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, संयम, धैर्य और अपने मूल्यों के साथ मार्ग पर बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है।

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