मिस्टिक स्टे
रंग-बिरंगे फानूस, दीवारों पर सजी कठपुतलियाँ और मेहरानगढ़ किले का मनमोहक नज़ारा। हया इस शाही हवेली की खूबसूरती में खो जाती है, लेकिन समर्थ के मन में कुछ अनजानी आशंकाएँ जन्म लेने लगती हैं। आखिर इस हवेली और उसके खास कमरे में ऐसा क्या है?

रंग-बिरंगे फानूस, दीवारों पर सजी कठपुतलियाँ और मेहरानगढ़ किले का मनमोहक नज़ारा। हया इस शाही हवेली की खूबसूरती में खो जाती है, लेकिन समर्थ के मन में कुछ अनजानी आशंकाएँ जन्म लेने लगती हैं। आखिर इस हवेली और उसके खास कमरे में ऐसा क्या है?
नागालैंड के एक छोटे से गांव की धुंधभरी सुबह में लिमा की आंखों में अपने खोए हुए भाई अतोई की यादें तैर रही थीं। पहाड़ों की खामोशी में उसे उसकी आवाज़ सुनाई देती थी। जब अचानक, उत्सव की रात धुंध में से अतोई की परछाई उभरी, तो लिमा की आँखों से बहते आंसुओं में उम्मीद की रोशनी चमक उठी। आमा की कहानियाँ और पहाड़ों का विश्वास सच हो गया—“पहाड़ अपने बच्चों को कभी तन्हा नहीं छोड़ते।”
यह कविता आत्मबल, साहस और जीवन संघर्षों के बावजूद आगे बढ़ते रहने की एक सशक्त अभिव्यक्ति है। इसमें कवि अपने जीवन की यात्रा को एक पर्वतारोहण की तरह प्रस्तुत करता है, जहां रास्ता कठिन है, पर मंज़िल की चाह अडिग है।
प्रारंभिक पंक्तियाँ प्रेरणादायक हैं — आँधियों और तूफानों को भी मात देने वाले उस ‘हौसले के दिए’ की बात होती है, जो अंधेरे में भी मार्ग दिखाता है। इसके बाद कविता सपनों की उड़ान की बात करती है, और बताती है कि थकना, रुकना या पीछे हटना विकल्प नहीं है।
यह एक ऐसा जोश भरा गीत है, जो संघर्षों को गीतों में पिरोकर उन्हें प्रेरणा में बदल देता है। वक्त ने चाहे कितनी भी सख्ती दिखाई हो, लेकिन वक्त ही नई रोशनी भी लाएगा — इस उम्मीद को कवि ने ‘नूर’ और ‘दीप’ जैसे प्रतीकों से दर्शाया है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यात्रा समय घटकर 2.5 घंटे रह गया है. यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड में पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई गति देगा.
कुछ रिश्ते नाम, दूरी और मुलाकातों के मोहताज नहीं होते। वे दिल से नहीं, रूह से जुड़ते हैं। रूहानी प्रेम एक ऐसा सूफ़ियाना एहसास है, जहाँ दो आत्माएं एक-दूसरे की खुशी, दर्द और खामोशियों को बिना कहे समझने लगती हैं।
नारी का हृदय प्रेम में जितना कोमल होता है, पीड़ा में उतना ही कठोर अनुभवों से गुजरता है। प्रेम से पीड़ा तक का यह सफ़र उसकी संवेदनाओं को भीतर तक झकझोर देता है। धोखा, अपमान और परित्याग उसके आत्म-सम्मान को धज्जी-धज्जी कर देते हैं, कभी-कभी तो उसे जीवन-लीला समाप्त करने की कगार पर पहुँचा देते हैं।
फिर भी वही नारी आँसुओं में भी शक्ति ढूँढ़ लेती है। टूटकर भी वह बिखरती नहीं, बल्कि खुद को गढ़ लेती है—अपनी प्रतिमा, जिसमें प्राण फूँकने के लिए किसी और की आवश्यकता नहीं। यही उसका आत्मविश्वास है, यही उसकी सच्ची शक्ति।
कृति ने परिवार के लिए अपने सपनों और इच्छाओं को बार-बार पीछे रखा, लेकिन मन के भीतर सुलगती आग कभी बुझी नहीं. वर्षों बाद उसे अपने त्याग का प्रतिफल एक अप्रत्याशित स्नेह में मिलता है.
रील और वायरल होने की दौड़ में क्या रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं? जानिए कैसे सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव शादी, परिवार, दोस्ती और सामाजिक जीवन की भावनाओं को बदल रहा है.
कभी-कभी कुछ यादें सिर्फ प्रश्न नहीं होतीं, वे उत्तर भी नहीं होतीं—वे प्रार्थनाओं जैसी होती हैं, जो किसी के दिल की दहलीज़ पर दीप की तरह जलती रहती हैं। यह कविता नहीं, बल्कि प्रेम की उस शांत पुकार का दस्तावेज़ है जो बिना किसी आरोप या उत्तरदायित्व के, बस यादों की नम परतों में छुपा होता है। जब भी मन थक जाए, कोई मुस्कान याद आ जाए, या बारिश में घुलने की इच्छा हो, तब लौट आने की स्वीकृति देने वाली यह पुकार, प्रेम की सबसे कोमल और निस्वार्थ अभिव्यक्ति है। प्रेम, जहाँ आना जाना नहीं, बस “होना” ही काफ़ी होता है।
ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा, देते हो सबको सद्ज्ञान।किसी तरह का भेद न करते, तुम पर हमको अभिमान।। जो भी आया शरण तुम्हारी, उसको तुमने अपनाया।जड़-मूरख मन में भी, तुमने ज्ञान का दीप जलाया।सदा सिखाया बच्चों को करना आदर-सम्मान।ईश्वर से ऊँचा स्थान तुम्हारा, देते हो सबको सद्ज्ञान।किसी तरह का भेद न करते, तुम पर हमको…