सिर्फ तुम चाहिए

साधारण सूती साड़ी पहने महिला और ब्रांडेड कपड़ों में खड़ा पुरुष, सादगी और दिखावे के बीच भावनात्मक अंतर दर्शाता दृश्य सादगी बनाम ब्रांडेड जीवन का भावनात्मक दृश्य

रोहिणी पांडे, लेखिका, नांदेड़

मुझ से मिलने जब आना 

तब उतारकर आना 

तुम्हारे ब्रांडेड मिजाज,

ब्रांडेड मोजे,जूते और चश्मा भी

और पहने के आना सादगी….

वो क्या है ना 

मेरी सूती साड़ी 

घबरा जाती है, सहम जाती है

और डरने लगती है

ख़ुद के ही सादगी से

और तुम …

तुम भी तो तुम नहीं रहते

उन ब्रँड्स को संभालते 

संभालते!

और मुझे

सिर्फ़ तुमसे मिलना है

ये रचनाएं भी पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें-
इश्क़: पहली सांस भी, आख़िरी भी
पल-पल जीवन
विंध्यवासिनी माता

13 thoughts on “सिर्फ तुम चाहिए

  1. मेरी रचना को यहां स्थान देने के लिए बहुत शुक्रिया

  2. बहुत सादगीपूर्ण अभिव्यक्ति.
    बधाई और शुभकामना

  3. बहुत ही कम शब्दों और सरलता से अर्थ पूर्ण अभिव्यक्ति। बधाई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *