तन भादों, मन सावन

कविता में भावनाओं का सुंदर चित्रण है। यह उन अनुभवों और एहसासों की गहनता को व्यक्त करती है जो प्रेम और मिलन से उत्पन्न होते हैं। कवि अपने प्रिय के नेह में भीगकर अपने तन और मन में सावन का अहसास महसूस करता है। उसकी नजरों में प्रिय का रूप पनीला और मोहक प्रतीत होता है, और हर अंग में प्रेम की ज्वाला फैल जाती है। हवाओं के बहने से तन और मन बहक उठते हैं, और मिलन और बिछड़ने के पल झूलों की तरह आते-जाते हैं। हवाओं के माध्यम से प्रिय के शरीर की अनुभूति से सागर का सौंदर्य और जलमयता मन में उतर जाती है। जब से प्रिय उसके जीवन में आए हैं, उसका तन और मन उनके प्यार का घर और आँगन बन गया है। उसके अंतरतम में प्रिय के बसने से तन मंदिर और मन पावन हो गया है। यह कविता प्रेम के गहन अनुभव, मिलन की तृष्णा और भावनाओं की पवित्रता को उजागर करती है

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चाँदनी में खोया दिल

आज की रात चाँदनी बहुत मतवाली है। चाँद भी मानो सोच रहा हो कि उसकी तो अपनी दीवाली है। साँझ ढलते ही माँ घर में चुप हैं और सोच रही हैं कि अपने परिवार के लिए क्या पकाएँ, क्योंकि रोटी का तवा खाली है। वहीं हमदम भी यह सोच रहा है कि आस-पास बिखरा लाल रंग उसकी प्रिय की लाली का प्रतीक है। मैं जब उसे देखता हूँ, तो महसूस करता हूँ कि खुद को ही भूल गया हूँ। ‘कनक’ अब इश्क़ में कंगाल हो चुका है, लेकिन यह मतवाली चाँदनी और प्रेम की लाली सब कुछ बयां कर देती है।

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जरा-ज़रा तू हमसे मिल

मन बार-बार उस प्रिय को पुकारता है—“जरा-सा मिलो, तनिक-सा मेरे दिल में उतर आओ।” आँखें जो कहती हैं, वही शब्दों से सुनना चाहता है। सपनों में बीती रातें और अंतस की अनकही बातें, सब उसी से जुड़ी हैं। उसका साथ वेदना हर लेता है, उसके अधरों की मुस्कान अमृत बरसाती है। यदि मिल न पाए तो हृदय तड़प-तड़प कर व्याकुल हो उठता है। अब तो चाह यही है कि वह बिना दस्तक इस जीवन में आ बसे, और परिणय के बंधन में सब कुछ स्थिर हो जाए। उसकी आँखों की गहराई में डूब जाना मानो किसी झील में समा जाना है।

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तुम्हारे बाद भी, तुम्हारी निशानियाँ

तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारी हर छोड़ी हुई चीज़—कपड़े, प्याली, तौलिया—मुझे तुम्हारी याद दिलाती है। तुम बिखेरते जाते हो और मैं उन्हें जतन से सहेजती जाती हूँ, क्योंकि इन्हीं में हमारा रिश्ता साँस लेता है।”

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साधारण सूती साड़ी पहने महिला और ब्रांडेड कपड़ों में खड़ा पुरुष, सादगी और दिखावे के बीच भावनात्मक अंतर दर्शाता दृश्य

सिर्फ तुम चाहिए

यह कविता आधुनिक जीवन के दिखावे और सादगी के बीच के द्वंद्व को बेहद मार्मिक तरीके से प्रस्तुत करती है। कवि यह संदेश देता है कि रिश्तों में ब्रांड्स और बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि सच्चाई और सादगी ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। प्रेम का असली रूप व्यक्ति के भीतर होता है, न कि उसके पहनावे या स्टेटस में।

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