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दूसरों पर टिकी खुशी, भीतर से टूटता मन

जब खुशियाँ दूसरों पर निर्भर हो जाती हैं, तब टूटना तय होता है। यह लेख बाहरी और आंतरिक खुशी के फर्क को समझाते हुए आत्मनिर्भर, स्थिर और सच्ची खुशी की ओर ले जाने वाला भावनात्मक आत्मचिंतन है।

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मोबाइल फोन हाथ में लिए एक युवा महिला संदेश का इंतज़ार करती हुई, जबकि स्क्रीन पर "Seen" दिखाई दे रहा है। यह रिश्तों में बेंचिंग, भावनात्मक दूरी और बैकअप प्लान बनने की स्थिति को दर्शाता है।

बैकअप प्यार :”बेंचिंग”

क्या आपका पार्टनर आपको सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर याद करता है? जानिए रिश्तों में बढ़ रहे ‘बेंचिंग’ ट्रेंड, पुरानी पीढ़ी की टालमटोल से इसकी समानता और खुद को भावनात्मक शोषण से बचाने के आसान तरीके।

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ज़िंदगी गुनगुनाने लगी

अब ज़िंदगी मानो गुनगुनाने लगी है। हवा की धीमी-धीमी बयार की तरह इसमें मिठास घुलने लगी है। मीठे सपनों की छाँव में रात भी अलसाई-सी करवट लेती है। मन अजीबोगरीब खयाल बुनता रहता है और उजली चांदनी-सी उम्मीद सँजोए रहता है।

बातों और मुलाक़ातों का सिलसिला लगातार चलता है, फिर भी दिल के भीतर कहीं एक हल्की-सी खलिश बनी रहती है। बीते दिनों में चारों ओर दावानल था, घाव भी हरे-भरे थे। ऐसे कठिन समय में उसकी बातें मोगरे की महक जैसी सुकून देती थीं।

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महिदपुर रोड में प्रवचन देतीं साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज

‘जहां रिलेशन होगा, वहीं रिएक्शन होगा’

महिदपुर रोड के राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने राग-द्वेष से मुक्त होने, मैत्री भाव अपनाने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया.

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अपने छोटे बच्चे का हाथ थामे मुस्कुराते हुए एक पिता, जो सुरक्षा, प्रेम और विश्वास का प्रतीक है।

पापा

पिता सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं, बल्कि वह साया हैं जो हर मुश्किल में अपने बच्चों के साथ खड़ा रहता है। पढ़िए पिता के प्रेम, त्याग और निस्वार्थ समर्पण को समर्पित यह मार्मिक कविता।

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भगवान राम का शांत और दिव्य रूप, धनुष-बाण के साथ, चारों ओर प्रकाशमय आभा और आध्यात्मिक वातावरण

घट-घट में बसे हैं राम

हर कण में, हर श्वास में, हर भाव में राम का वास है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि सच्ची शांति बाहर नहीं, बल्कि अपने ही हृदय में बसे राम के स्मरण में है।

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नारी केवल शब्द नहीं, मानवता की पहचान है |

नारी

नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि ममता, त्याग, साहस, धैर्य और मानवता की पहचान है। यह कविता नारी के विविध रूपों और उसके अमूल्य योगदान को समर्पित है।

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साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. का महिदपुर रोड में भव्य मंगल प्रवेश

साध्वी शाश्वतप्रिया म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश

महिदपुर रोड में साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश। गुरुदेव जयघोष, धर्मसभा और रतलाम चातुर्मास निमंत्रण।

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भव्य बंगले में जन्मदिन समारोह के बाद अकेली बैठी एक महिला, जिसके पास उसकी बहू सहानुभूति से बैठी है, रिश्तों और मानवता का भावनात्मक दृश्य।

सुनहरी ज़ंजीरें

मुंबई के पॉश इलाके में समुद्र के किनारे बना “रत्नालय” दूर से किसी महल जैसा दिखाई देता था। ऊँची दीवारें, चमचमाती काँच की खिड़कियाँ, विदेशी गाड़ियाँ और हर समय आने-जाने वाले लोगों की भीड़—ये सब कुछ उस आलीशान घर की हैसियत बयान करती थीं।

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