दूसरों पर टिकी खुशी, भीतर से टूटता मन
जब खुशियाँ दूसरों पर निर्भर हो जाती हैं, तब टूटना तय होता है। यह लेख बाहरी और आंतरिक खुशी के फर्क को समझाते हुए आत्मनिर्भर, स्थिर और सच्ची खुशी की ओर ले जाने वाला भावनात्मक आत्मचिंतन है।

जब खुशियाँ दूसरों पर निर्भर हो जाती हैं, तब टूटना तय होता है। यह लेख बाहरी और आंतरिक खुशी के फर्क को समझाते हुए आत्मनिर्भर, स्थिर और सच्ची खुशी की ओर ले जाने वाला भावनात्मक आत्मचिंतन है।
क्या आपका पार्टनर आपको सिर्फ ज़रूरत पड़ने पर याद करता है? जानिए रिश्तों में बढ़ रहे ‘बेंचिंग’ ट्रेंड, पुरानी पीढ़ी की टालमटोल से इसकी समानता और खुद को भावनात्मक शोषण से बचाने के आसान तरीके।
अब ज़िंदगी मानो गुनगुनाने लगी है। हवा की धीमी-धीमी बयार की तरह इसमें मिठास घुलने लगी है। मीठे सपनों की छाँव में रात भी अलसाई-सी करवट लेती है। मन अजीबोगरीब खयाल बुनता रहता है और उजली चांदनी-सी उम्मीद सँजोए रहता है।
बातों और मुलाक़ातों का सिलसिला लगातार चलता है, फिर भी दिल के भीतर कहीं एक हल्की-सी खलिश बनी रहती है। बीते दिनों में चारों ओर दावानल था, घाव भी हरे-भरे थे। ऐसे कठिन समय में उसकी बातें मोगरे की महक जैसी सुकून देती थीं।
महिदपुर रोड के राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने राग-द्वेष से मुक्त होने, मैत्री भाव अपनाने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया.
हर कण में, हर श्वास में, हर भाव में राम का वास है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि सच्ची शांति बाहर नहीं, बल्कि अपने ही हृदय में बसे राम के स्मरण में है।
महिदपुर रोड में साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश। गुरुदेव जयघोष, धर्मसभा और रतलाम चातुर्मास निमंत्रण।
“देश की धरा” एक वैचारिक और संस्कृतनिष्ठ कविता है, जो भारत की सनातन चेतना, वैदिक परंपरा और मानवतावादी दृष्टि को शब्दों में उकेरती है।
मुंबई के पॉश इलाके में समुद्र के किनारे बना “रत्नालय” दूर से किसी महल जैसा दिखाई देता था। ऊँची दीवारें, चमचमाती काँच की खिड़कियाँ, विदेशी गाड़ियाँ और हर समय आने-जाने वाले लोगों की भीड़—ये सब कुछ उस आलीशान घर की हैसियत बयान करती थीं।