डाउन सिंड्रोम : थोड़ा अलग, लेकिन सबसे खास
डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक स्थिति है, लेकिन यह किसी बच्चे की संभावनाओं को सीमित नहीं करती। सही देखभाल, संतुलित आहार और माँ के प्यार से ऐसे बच्चे भी आत्मनिर्भर और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक स्थिति है, लेकिन यह किसी बच्चे की संभावनाओं को सीमित नहीं करती। सही देखभाल, संतुलित आहार और माँ के प्यार से ऐसे बच्चे भी आत्मनिर्भर और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
प्रीति गुप्ता ने पिछले 15 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जरूरतमंदों की सहायता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है. 11 हजार से अधिक बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण और जरूरतमंद बेटियों के सामूहिक विवाह जैसे प्रयास उनकी सेवा यात्रा की पहचान हैं.
बेंगलुरु के एक निजी स्टूडियो में मैटरनिटी फोटोशूट के दौरान तीन साल के मासूम की तालाब में डूबने से मौत हो गई. सात माह की गर्भवती मां शूट में व्यस्त थी, तभी खेलते-खेलते बच्चा परिसर के तालाब में गिर गया. यह दर्दनाक हादसा सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.
केदारनाथ धाम की यात्रा को लेकर इस बार प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है .केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू होगी, लेकिन इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पूरी प्रक्रिया 100 प्रतिशत ऑनलाइन कर दी गई है. इसका सीधा उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी और धोखाधड़ी पर पूरी तरह रोक लगाना है.
बचपन से गाड़ियों पर लिखे इस छोटे से शब्द को बड़े गौर से पढ़ते चले आ रहे हैं।छोटे में ज़ब पापा की गाड़ी का हॉर्न बजा देती थी तो पापा बहुत गुस्सा होते थे, बोलते थे कि ये हॉर्न तब बजाते हैं ज़ब हमें साइड की आवश्यकता हो। लोग हॉर्न की आवाज सुनकर एक तरफ हो जाते हैं।
इमारत के छोटे से फ़्लैट में रहने वाले सक्सेना दंपती की ज़िंदगी एक-दूसरे के इर्द-गिर्द सिमटी थी। लेकिन एक सुबह अचानक आई आंटी की मौत ने सब कुछ बदल दिया। लकवे से ग्रस्त अंकल अपनी आँखों के सामने सब कुछ होते हुए देख भी कुछ नहीं कर पाए। यह हृदयविदारक घटना अकेले रह रहे बुज़ुर्गों की असहायता और समाज की अनदेखी पर गहरे सवाल खड़े करती है।
आजादी का कृष्णपक्ष**” में कवि स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव की उमंग और उल्लास का चित्रण करते हुए हमें याद दिलाता है कि यह आजादी सहज या मुफ्त में नहीं मिली थी। नीति-कुशलता और योजनाओं के बल पर विदेशी शक्तियों ने भारत में अपने पैर जमाए और “सोने की चिड़िया” के घर में लूटपाट मचाई। फूट डालकर शासन करने की नीति ने धर्मों पर संकट और आपसी विभाजन की आग फैलाई।आजादी के स्वप्न देखने वाले वीरों ने प्राणों की आहुति दी, परंतु उन्हें यह आभास भी नहीं था कि स्वतंत्रता के साथ ही देश को बंटवारे का फरमान मिलेगा। इस उपलब्धि में असंख्य जवानियों की कुर्बानी और बंटवारे में छुपी अनेक अनसुनी कहानियाँ शामिल हैं, जिनमें दुख, करुणा, आतंक और दर्द की गहरी परतें छिपी हैं। विभाजन और विस्थापन के दौरान साथ निभाने वालों ने ही घर-द्वार लूट लिए, मानवता पर पशुता हावी हो गई, हिंसा ने अहिंसा को ढक लिया। कवि आने वाली पीढ़ियों को यह सच्चाई बताने का आग्रह करता है कि भारत नफरत और हिंसा की आड़ में खंडित हुआ।
एक बूढ़ा डाक बंगला अपनी आंखों से देखे कस्बे के बदलते समय, लोगों, रिश्तों और भूली-बिसरी यादों की खट्टी-मीठी कहानियां सुनाता है. पढ़िए 36 शख्स… 36 कहानियां.
दायरे सिमटते रहे और दूरियाँ बढ़ती रहीं।
हर रोज़ खुद को तराशते गए, फिर भी कमियाँ निकलती रहीं। उसके बदले हुए लहजे तीर बनकर लगे,और हम हर गिरावट के बाद हुनर से फिर सँभलते रहे।