साध्वी शाश्वत प्रिया श्री जी महाराज साहब धर्म सभा को संबोधित करते हुए

खाली हाथ नहीं, श्रद्धा के साथ हों परमात्मा के दर्शन

पुण्योदय के योग से हमें परमात्मा का जिन शासन और जैन कुल प्राप्त हुआ है. मनुष्य भव को सफल बनाने के लिए केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और विधिपूर्वक अष्टप्रकारी पूजा के साथ धर्म आराधना आवश्यक है. देव, गुरु और धर्म के प्रति जागृत भाव ही जीवन को सही दिशा देते हैं.

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एक व्यक्ति शांत वातावरण में डायरी लिखते हुए, मन की गहराई को व्यक्त करता हुआ

मन की कही

“मन की कही” एक भावनात्मक और आत्मचिंतन से भरी हिंदी रचना है, जो मन की उन अनकही बातों को व्यक्त करती है जिन्हें हर किसी से साझा नहीं किया जा सकता। यह लेख विश्वास, आत्मीयता और मौन के महत्व को उजागर करता है, और बताता है कि क्यों हर दिल हमारे रहस्यों का भार नहीं उठा सकता। अंत में यह संदेश देता है कि एक पुस्तक ही सबसे सच्ची और निस्संदेह साथी बन सकती है।

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बेटियों का दर्द

बेटियाँ अपने मन का दर्द बार-बार चीख़ कर कहना चाहती रहीं। उनकी मासूम आँखों से गिरते आँसू और थरथराती आवाज़ें उनके भीतर छिपी पीड़ा का सबूत थीं। पर अफ़सोस, इस दुनिया ने उन चीख़ों को कभी सुनना ही नहीं चाहा। उनके शब्द हवा में गूँजते रहे, मगर कानों तक पहुँचने से पहले ही जैसे दीवारों से टकराकर बिखर जाते। समाज की बेरुख़ी इतनी गहरी थी कि मानो किसी को कोई ख़बर ही न हो कि बेटियाँ टूट रही हैं, बिखर रही हैं और भीतर ही भीतर मर रही हैं।

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दिल, दर्द और दमखम

यह ग़ज़ल इंसानी समझ, रिश्तों की पेचीदगियों, आत्मसम्मान और देशप्रेम के सूक्ष्म भावों को बेहद नफ़ासत से पिरोती है। कभी दुनिया की चालाकियों पर तीखा सवाल उठाती है, तो कभी अपने ही घावों को मरहम की तरह सँभाल लेने का सलीका दिखाती है। इश्क़ की कोमल धड़कनों से लेकर हमदम और रकीब की पहचान तक हर शेर एक अलग दुनिया खोलता है। अंतिम शेर ग़ज़ल को असाधारण ऊँचाई देता है, जहाँ धर्म से ऊपर उठकर वतन को सर्वोपरि माना गया है। यह सिर्फ शायरी नहीं, जीवन के अनुभवों की तराशी हुई सच्चाई है।

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खेत में मेहनत करती माँ और उसके साथ खड़ा बच्चा, जो गरीबी और शिक्षा के संघर्ष को दर्शाता है

ये कैसा सवाल

गरीबी और मजबूरी के बीच पला-बढ़ा एक छोटा सा बच्चा, जब जीवन की सच्चाई को करीब से देखता है, तो उसके भीतर एक बड़ा बदलाव जन्म लेता है। यह कहानी आठ वर्षीय भानु और उसकी मजदूर माँ रमिया की है, जो रोज़मर्रा की कठिनाइयों के बीच भी अपने बेटे के बेहतर भविष्य का सपना देखती है।

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पेड़ के नीचे ध्यान में बैठा व्यक्ति और सामने प्रकाश रूप में प्रकट चेतना, आत्मसंवाद और आंतरिक शांति का प्रतीक

चेतना और मनुष्य का संवाद

यह रचना मनुष्य और उसकी चेतना के बीच एक गहन संवाद को प्रस्तुत करती है, जहाँ आत्ममंथन, मोह, विरक्ति और जीवन के सत्य पर गंभीर प्रश्न उठते हैं। यह केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा है, जो व्यक्ति को स्वयं से साक्षात्कार की ओर ले जाती है।

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मध्य रेल द्वारा मध्य रेल वॉल कैलेंडर 2026 का विमोचन

मध्य रेल के महाप्रबंधक श्री विवेक कुमार गुप्ता ने सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को मध्य रेल वॉल कैलेंडर 2026 का विमोचन किया. इस वर्ष वॉल कैलेंडर की थीम वंदे मातरम के 150 ऐतिहासिक वर्ष रखी गई है, जिसका शीर्षक गीत से आत्मा तक, राष्ट्र को एकजुट करना है

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खजुराहो यात्रा गाइड: दर्शनीय स्थल, होटल और पहुंचने की पूरी जानकारी

खजुराहो: पत्थरों में सांस लेती एक जीवंत सभ्यता

मध्य प्रदेश का खजुराहो विश्वविख्यात मंदिरों, अद्भुत शिल्पकला और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है. इस गाइड में जानें दर्शनीय स्थल, पहुंचने के साधन, होटल और खाने की पूरी जानकारी.

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