तुम कितना बदल गए हो

तुम कितना बदल गए हो,

मैं तो आज भी वैसी ही हूँ,
तुम कितना बदल गए हो।

याद है मुझे आज भी
वो पहली बार तुम्हारे
साथ तुम्हारे घर आना।

तुम्हारी ही रसोई में
तुम्हारे लिए कुछ पकाना,
और तुम्हारा एकटक
सिर्फ मुझे निहारना।

मैं तो आज भी वैसी ही हूँ,
तुम कितना बदल गए हो।

मुझे याद है आज भी
वो तुम्हारी पसंद की
लाई हुई साड़ी पहनना,
और तुम्हारा एकटक
सिर्फ मुझे निहारना।

मैं तो आज भी वैसी ही हूँ,
तुम कितना बदल गए हो।

मुझे याद है आज भी
ऑफिस से आकर
मुझसे बात करने का
कोई न कोई बहाना ढूँढना,
मेरी खामोशी को एकटक
यूँ ही निहारते रहना।

मैं तो आज भी वैसी ही हूँ,
तुम कितना बदल गए हो।

मुझे तो आज भी
सब कुछ याद है,
सिर्फ तुम ही सब
कुछ भूल गए हो।

अगर अब बदल गई मैं भी,
तो सवाल मुझसे नहीं, खुद से करना।

क्योंकि मैं तो आज भी वैसी ही हूँ,
तुम कितना बदल गए हो।

संध्या श्रीवास्तव, प्रसिद्ध लेखिका, लखनऊ

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