अंशिका मालवीय 12वीं 89.6% से रचा इतिहास

समर्पण और सफलता की मिसाल: अंशिका मालवीय

गुरुकुल मानस एकेडमी की छात्रा अंशिका मालवीय ने 12वीं में 89.6% अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी यह सफलता मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है, जो अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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बिना पोज, बिना प्रमोशन, सिर्फ प्यार

नया साल, चमकती रोशनी, जश्न में डूबा न्यूयॉर्क और उसी भीड़ में एक ऐसा पल जो किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था. रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण का न्यू ईयर सेलिब्रेशन अब सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की सबसे चर्चित लव स्टोरी बन चुका है.

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विरह

निशा की नीरवता में बैठी नायिका प्रतीक्षा में लिपटी है .हवा में भीगी चाँदनी, शरीर पर ओस की बूँदें जैसे भावना का स्पर्श कर रही हों। वह प्रिय के आगमन की राह में सजी-संवरी है, मानो सावन स्वयं प्रेम का संदेश लेकर आया हो। मन में उमड़ती आशाओं से मोतियों का हार पिरोती, पलकें प्रतीक्षा की लाली से भीग उठी हैं।

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तिरंगा – हमारा मान

भारत में “तिरंगा” शब्द भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को संदर्भित करता है। हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना ध्वज होता है, जो उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज को उसके वर्तमान स्वरूप में 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले, 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में और उसके बाद भारत गणराज्य के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में कार्य करता रहा।

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भव्य बंगले में जन्मदिन समारोह के बाद अकेली बैठी एक महिला, जिसके पास उसकी बहू सहानुभूति से बैठी है, रिश्तों और मानवता का भावनात्मक दृश्य।

सुनहरी ज़ंजीरें

मुंबई के पॉश इलाके में समुद्र के किनारे बना “रत्नालय” दूर से किसी महल जैसा दिखाई देता था। ऊँची दीवारें, चमचमाती काँच की खिड़कियाँ, विदेशी गाड़ियाँ और हर समय आने-जाने वाले लोगों की भीड़—ये सब कुछ उस आलीशान घर की हैसियत बयान करती थीं।

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मीरा, शिव-पार्वती और प्रकृति के माध्यम से सच्चे प्रेम को दर्शाती एक हिंदी कविता

मीरा से शिव तक

“प्रेम” एक गहन और विचारोत्तेजक कविता है, जो सच्चे प्रेम की वास्तविकता पर प्रश्न उठाती है। यह रचना बताती है कि प्रेम केवल शब्दों या दिखावे में नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और आंतरिक अनुभूति में बसता है। मीरा की भक्ति, शिव-पार्वती का अटूट संबंध और प्रकृति के रूपक इस भाव को और गहराई देते हैं। कविता यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज के समय में कोई प्रेम को उसकी सच्ची भावना के साथ समझ पाता है। यह एक आत्ममंथन और प्रेम की सच्ची परिभाषा को खोजने की सुंदर कोशिश है।

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हिंदी और साहित्य में करियर की नई दिशाएँ: राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

उज्जैन। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला एवं ललित कला अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी हिंदी भाषा और साहित्य में करियर की नई दिशाएँ विषय पर केंद्रित थी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वक्ता नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार…

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प्रेम और विश्वास को दर्शाती हिंदी कविता – तुम राज़दां हो मेरी

मनमीत

तुम मेरे जीवन का वह विश्वास हो, जो अँधेरों में भी राह दिखाता है। जब संसार डगमगाता है, तब तुम्हारी मौजूदगी मुझे स्थिर रखती है। यह साथ किसी वचन या शपथ से बड़ा है. यह आत्मा की स्वीकृति है, जहाँ भय का कोई स्थान नहीं। तुम्हारे इश्क़ में मुझे सुकून मिला है, ऐसा सुकून जो प्रश्न नहीं करता, केवल स्वीकार करता है। हम दो शरीर नहीं, एक ही चेतना के विस्तार हैं तुम मेरी साधना हो और मैं तुम्हारी आस्था। इसी निष्कपट प्रेम में जीवन की हर कठिनाई सहज हो जाती है, और हर पथ आलोकित।

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स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणें जब धरती को आलोकित करती हैं, तब प्रकृति का हर कण जीवन, सौंदर्य और नवचेतना का संदेश देता है

स्वर्णिम प्रभात

स्वर्णिम प्रभात की सुनहरी किरणों से आलोकित यह कविता प्रकृति के अनुपम सौंदर्य, पक्षियों के मधुर कलरव, उषा की मनोहारी लालिमा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह रचना प्रकृति के प्रति प्रेम, कृतज्ञता और संरक्षण की भावना जागृत करती है।

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