Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
मायके से विदा होती भावुक महिला, माँ की याद में डूबी

दूब-धान

“दूब-धान” एक अत्यंत भावनात्मक हिंदी कहानी है, जो माँ की याद, मायके का खालीपन और बिछड़ते रिश्तों की गहरी संवेदनाओं को उकेरती है। यह मदर-डॉटर स्टोरी हिंदी नवरात्रि के भावनात्मक परिवेश में उस दर्द को सामने लाती है, जब एक बेटी अपने मायके लौटती है, लेकिन माँ की अनुपस्थिति हर कोने में चुभती है। “दूब-धान” केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों की अभिव्यक्ति है, जिन्हें शब्दों में कहना कठिन होता है। यह emotional hindi story हर पाठक के दिल को छू जाती है।

Read More
प्रेम, स्वतंत्रता और अधूरे रिश्तों की एक गहरी कहानी

रुह का रिश्ता

कभी-कभी सच्चा प्रेम किसी को पा लेने में नहीं, बल्कि उसकी आत्मा को फिर से जीवित कर देने में छिपा होता है। राघव और रिद्धिमा की यह कहानी प्रेम, स्वतंत्रता और आत्मीयता के उसी गहरे एहसास को महसूस कराती है।

Read More
नीले और सुनहरे रंग की पृष्ठभूमि में बारह राशियों के प्रतीकों से बना ज्योतिषीय चक्र, जो 29 जून 2026 के दैनिक राशिफल और भविष्यफल को दर्शा रहा है।

आज का राशिफल 29 जून 2026

29 जून 2026 का दैनिक राशिफल आपके करियर, व्यापार, प्रेम, पारिवारिक जीवन और आर्थिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत लेकर आया है। जानिए मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्यफल, साथ ही अपना शुभ रंग और शुभ अंक।

Read More

दुविधा का रंग

यह जीवन की वह अवस्था है जहाँ न बचपन की मासूमता पूरी तरह बची है, न बुढ़ापे का सुकून मिला है। जिम्मेदारियों के बीच खड़ा इंसान कभी समाज की अपेक्षाओं को सुनता है, तो कभी अपने दिल की धीमी पुकार को। इसी द्वंद्व में वह खुद को पहचानता है और समझता है कि यही सफ़र जीवन का असली रंग है।

Read More

ग़ज़ल

प्यार से लबरेज़ दुनिया में कोई गर दिल न हो तब तो ये दुनिया भी शायद रहने के क़ाबिल न हो सूना सूना भूतिया सा मुझको लगता अपना घर जब तलक आँगन में कोई बच्चों की खिल खिल न हो बस चले जाना ही हर दिन आदमी का शग़्ल है कोई दिन उसका न होता…

Read More

पुश्तैनी घर

पुश्तैनी घर ईंट-पत्थर नहीं होते, वे पीढ़ियों की साँसें सँजोए रहते हैं। उनकी दीवारों में हँसी की गूँज, डाँट की तपिश और रिश्तों की गर्माहट कैद रहती है। जब हम उन्हें छोड़ देते हैं, वे धीरे-धीरे खंडहर नहीं, मौन पीड़ा में बदलते हैं जीते-जी मरते हुए।

Read More

ऐसे न तुम रूठा करो

कुछ गिला कुछ बात कुछ शिकवा करो… जाने जां ऐसे न तुम रूठा करो।” तकरार और मोहब्बत के बीच झूलती यह पंक्तियाँ रिश्तों की उस नाज़ुक दूरी को छूती हैं जहाँ रूठना भी प्रेम का हिस्सा है।

Read More

जरूरी

दामोदर ने कहा, “शहर में तीन दिन से कर्फ्यू था। आज हटते ही दो सौ रुपए की मजदूरी हुई। कल बाबा का श्राद्ध है, कुछ किराना ले आता हूँ।”
पत्नी ने चिंता जताई, “अम्मा की तबियत देख लो, पांच बार उल्टी की और बुखार भी तेज है।”
दामोदर ने पूछा, “फिर क्या करूँ?”
पत्नी ने कहा, “नुक्कड़ वाले डॉक्टर साहब के पास चलो। इलाज जरूरी है।”दामोदर ने मान लिया, “हाँ, सही है। पहले अम्मा का इलाज।”

Read More
“दीपक और फूलों के साथ शांत वातावरण में की जा रही पूजा, आस्था और भक्ति का प्रतीक”

आस्था एवं पूजा

आस्था और पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा का ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है। जब भक्ति सच्चे मन और निष्कपट भाव से की जाती है, तभी वह ईश्वर तक पहुँचती है। “आस्था एवं पूजा” कविता इसी सत्य को सरल और प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है।

Read More
माँ और बेटी का भावुक दृश्य, बेटी अपनी माँ को लाल लिपस्टिक लगाते हुए, जीवन में रंग लौटने का प्रतीक

न्यूड लिपस्टिक

नई उम्र में ही रंजू की दुनिया जैसे अचानक रंगहीन हो गई थी। जिस आईने के सामने वह कभी सजती-संवरती थी, अब उसी आईने में उसे अपना चेहरा भी अजनबी सा लगता था। बारहवें के दिन जब ननद उसके लिए श्रृंगार का सामान लेकर आई, तो उसके भीतर दबा हुआ सारा दर्द आँसुओं में बह निकला“अब इन सबका क्या करूँ दीदी?”

Read More