महिला स्वास्थ्य पर महिला विमर्श कार्यक्रम संपन्न

शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, महिला कार्य, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में महिला विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “महिला स्वास्थ्य: सर्वोच्च प्राथमिकता” रहा।

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नींद और शांति का राज: लैवेंडर की खुशबू

“सोने से पहले तकिए पर 2–3 बूँदें लैवेंडर तेल डालें। इसकी खुशबू तनाव कम करती है, शरीर को शांत करती है और नींद को गहरा बनाती है। भले ही असर कुछ हद तक विश्वास (प्लेसबो) से हो, फिर भी सोने का माहौल सुखद और आरामदायक बनता है।”

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नवल चाँद

शरद पूर्णिमा की वह रात सचमुच अद्भुत थी। आकाश में श्वेत रंग का धवल, नवल चाँद अपने पूरे तेज और सौंदर्य के साथ चमक रहा था। रात्रि अपने चरम पर थी, और उसी चरम पर वह पूर्ण चाँद था—निर्मल, चंचल, अद्भुत। ऐसा लगता था मानो प्रकृति स्वयं नवजीवन का स्वागत कर रही हो। वातावरण में एक अनकही शांति थी, जो भीतर तक उतर जाती थी। हर कोई जैसे प्रभु के चरणों में ध्यानमग्न था, उस दिव्यता में खोया हुआ। सचमुच, उस रात का वह चाँद ईश्वर का वरदान था—श्वेत वर्ण का, नवल और परम सुंदर चाँद।

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महाकाल की भक्ति और सेवा: कावड़ यात्रियों के लिए अन्नक्षेत्र

श्रावण मास में उज्जैन आने वाले कावड़ यात्रियों के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर के पास अस्थायी अन्नक्षेत्र की शुरुआत की है, जहाँ प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरित किया जा रहा है। यह भोजन महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में तैयार होकर भगवान को भोग लगाने के बाद यात्रियों तक पहुँचाया जाता है। समिति द्वारा सोमवार को व्रती भक्तों के लिए फलाहारी खिचड़ी और चिप्स की भी विशेष व्यवस्था की गई है। वर्ष 2004 से यह अन्नक्षेत्र परंपरा रूप से संचालित हो रहा है, जो भक्तों के दान से चलती है। विशेष अवसरों पर श्रद्धालु भोजन प्रसादी के लिए मंदिर को दान भी करते हैं। पहले सोमवार को 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नक्षेत्र का लाभ उठाया।

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सिंदूर-खेला

पूजा पंडाल में ढोल की थाप गूँज रही थी। विसर्जन से ठीक पहले का दिन! लाल बॉर्डर की सफेद साड़ी में सजी महिलाएँ माँ दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर, एक-दूसरे की माँग और गालों पर रंग भर रही थीं।

भीड़ के बीच खड़ी रितुपर्णा बाहर से मुस्करा रही थी, मगर भीतर खालीपन था। कुछ महीने पहले पति ने शराब के नशे में घर से निकाल दिया था। अकेली रहती तो ठीक था, पर बच्चे की परवरिश? सोचकर दिल डूब जाता।

तभी उसकी नज़र पंडाल के कोने में गई—एक आदमी अपनी पत्नी पर चिल्ला रहा था। अगले ही पल गाल पर जोरदार थप्पड़! भीड़ ने देखा, पर सब चुप। औरत आँचल मसलती, आँखें झुकाए आँसू पोंछ रही थी।

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हर कदम, स्वच्छता की ओर

भारत को स्वच्छ बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति मिलकर कदम बढ़ाए और दिल से प्रयास करे तो कचरा चुनकर, गीले और सूखे कचरे को अलग रखकर हम अपने देश को स्वच्छ बना सकते हैं। शुद्ध हवा और निर्मल पानी हमारे जीवन के लिए अनिवार्य हैं, इसलिए प्रदूषण को रोकने और जल की प्रत्येक बूँद को बचाने का संकल्प लेना होगा। प्लास्टिक का उपयोग कम करना, कपड़े की थैली अपनाना और वृक्ष लगाना जैसे छोटे-छोटे कदम पर्यावरण को बचा सकते हैं। यदि हम सब मिलकर यह अभियान चलाएँ तो धरती को हरी-भरी दुल्हन की तरह सजा सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित भारत बना सकते हैं।

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मशाल थामे साथ दौड़ते लोग, एकता और सामूहिक सफलता का प्रेरक दृश्य।

अहं नहीं, वयं सत्य!

यह कविता ‘मैं’ से ‘हम’ की यात्रा को दर्शाती है। अहंकार, प्रतिस्पर्धा और आत्ममुग्धता के बीच सहयोग, मशाल सौंपने और साथ मिलकर मंज़िल पाने का गहरा संदेश देती है।

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आजन्म बिछोह

इस बार की यात्रा वैसी नहीं थी जैसी पहले हुआ करती थी। न तस्वीरें देखीं, न डायरी लिखी — मन एक अजीब उचाट, थका और शून्य में डूबा हुआ है। जूड़े के फूलों के बीच अब एक जोड़ी उदास आँखें महसूस होती हैं, जो स्मृतियों की तरह टंगी रह गई हैं। हर बार की तरह यह यात्रा आनंद नहीं, बल्कि एक सैलाब छोड़ गई — भावनाओं का, बिछोह का, और उस प्रेम का जो चुपचाप आता है और सब बहा ले जाता है। इस बार आषाढ़ केवल मौसम नहीं, एक डूबती आत्मा का रूप बन गया है। न प्रतीक्षा है, न वचन, न कोई सहारा — बस एक अंतहीन दूरी, जहाँ अगली मुलाकात की कोई संभावना नहीं। इस प्रेम की परिणति नहीं, केवल आजन्म बिछोह ही लिखा है।

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ओ पारिजात

रात गहरी हो रही है और हवा में पारिजात की सुगंध घुल रही है। मैं जागता हूँ और कविताएँ लिखता हूँ, पर शब्द अब इस खुशबू में मदहोश होने लगे हैं। मैं रंगों की सुंदरता नहीं चाहता .मुझे तो प्रेम का वही लाल रंग चाहिए जो आत्मा को महका दे। मैं चाहता हूँ कि मैं पारिजात के आँगन की उसी मिट्टी में बो दिया जाऊँ, और वहीं लगातार महकता रहूँ। इस सिंदूरी भोर में, एक स्पर्श भर से मेरी कविता फिर जीवित हो उठी है।

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तेरे जाने के बाद कविता

तेरे जाने के बाद

“तेरे जाने के बाद” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो किसी अपने के बिछड़ने के बाद जीवन में आए बदलावों को दर्शाती है। इसमें जिम्मेदारियों के बीच छिपे दर्द, घर के खाली कोने, यादों की चुप्पी और समय की सच्चाई को बेहद संवेदनशीलता से व्यक्त किया गया है। यह कविता बताती है कि समय घाव भरता नहीं, बल्कि जीना सिखाता है। मुस्कान के पीछे छिपा खालीपन और भीतर की थकान हर उस व्यक्ति की भावना है जिसने किसी खास को खोया है। यह कविता दर्द के साथ जीवन की परिपक्वता भी सिखाती है।

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