
ज्योति सोनी, प्रसिद्ध लेखिका, अलवर (राजस्थान)
श्वेत रंग का
धवल चाँद था,
शरद पूर्णिमा का
नवल चाँद था।
रात्रि अपने चरम पर थी,
उसी चरम पर पूर्ण चाँद था।
अद्भुत छवि थी,
चंचल छवि थी,
निर्मलता से भरी छवि थी —
कितना सुंदर परम चाँद था।
आज शरद ऋतु की
अगवानी करते,
नव जीवन की अगवानी करते,
सभी यही आह्वान करते —
प्रभु चरणों में ध्यान करते,
ईश्वर का वरदान — चाँद था,
श्वेत वर्ण का नवल चाँद था।

अति सुन्दर प्रस्तुति
Thx ji