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नवल चाँद

शरद पूर्णिमा की वह रात सचमुच अद्भुत थी। आकाश में श्वेत रंग का धवल, नवल चाँद अपने पूरे तेज और सौंदर्य के साथ चमक रहा था। रात्रि अपने चरम पर थी, और उसी चरम पर वह पूर्ण चाँद था—निर्मल, चंचल, अद्भुत। ऐसा लगता था मानो प्रकृति स्वयं नवजीवन का स्वागत कर रही हो। वातावरण में एक अनकही शांति थी, जो भीतर तक उतर जाती थी। हर कोई जैसे प्रभु के चरणों में ध्यानमग्न था, उस दिव्यता में खोया हुआ। सचमुच, उस रात का वह चाँद ईश्वर का वरदान था—श्वेत वर्ण का, नवल और परम सुंदर चाँद।

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