ईश्वर पर विश्वास

संपूर्ण हृदय से प्रभु पर भरोसा रखें और अपनी बुद्धि पर निर्भर न रहें। जीवन में चाहे सुख हो या दुख, भय और चिंता को त्यागकर ईश्वर की इच्छा में चलना ही सच्चा विश्वास है। प्रार्थना और समर्पण के माध्यम से हम आंतरिक शांति, स्थिरता और संतोष प्राप्त कर सकते हैं। ईश्वर पर भरोसा केवल आध्यात्मिक अनुभव नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक शक्ति भी देता है। जब हम अपनी चिंताओं को प्रार्थना में छोड़ देते हैं, तब हमारा बोझ हल्का होता है और हम जानते हैं कि हम अकेले नहीं हैं।

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तुम और मैं : दो छोर, एक डोर

हम कितने अलग हैं — फिर भी साथ हैं।
तुम दिन हो, उजले और स्पष्ट, जबकि मैं रात हूं — रहस्यमयी, गहराई में डूबी हुई।
तुम स्थिर तट की तरह शांत हो, और मैं बहते झरने की तरह बेफिक्र, निरंतर गतिमान।
तुम पर्वत की तरह अडिग और दृढ़ हो, जबकि मैं हवा की तरह चंचल, हर दिशा में बिखरती हुई।

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सुहाग पर्व करवा चौथ

यह कविता भारतीय विवाहिता की भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है। माता-पिता से विदा होकर नए घर में प्रवेश, पति के प्रति समर्पण और सुहागन होने का गौरव इसमें प्रमुख हैं। सोलह श्रृंगार, लाल चुनरी, मांग टीका, मेहंदी, पायल, चूड़ियाँ और मंगलसूत्र जैसे आभूषण उसकी पारंपरिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान को उजागर करते हैं। कविता में करवाचौथ व्रत और चौथ माता से अखंड सुहाग की कामना का भी उल्लेख है। यह अंश स्त्री के नए गृह जीवन, आशाओं और प्रेम भरे संबंधों की महत्ता को भावपूर्ण रूप से व्यक्त करता है।

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मंजिल मिल ही जायेगी

मंजिल पाने के लिए निरंतर प्रयास और पूरे विश्वास के साथ कदम बढ़ाते रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है। चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, या कश्तियों में छेद हों, लेकिन हौसला और रवानगी कभी कम नहीं होती। अंधकार में बिखरे जाल और पाश हमारी कोशिशों को रोकने की कोशिश करेंगे, पर जज्बे की शमा जलाकर हम उनसे मुक्त हो सकते हैं।

हर तिनका, हर छोटा प्रयास मिलकर एक मजबूत घोंसला बनाता है, और आंधियों में भी यह हौंसला कायम रहता है। मुश्किलें देखने के बाद भी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेहनत, अभ्यास और लगन से हर समस्या का हल निकलता है।

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चन्दन की चांदनी

चांदनी का यह पहला करवा चौथ था, लेकिन उसका पति चन्दन उसके साथ नहीं था। शादी को अभी साल भी पूरा नहीं हुआ था और चंदन को हेड ऑफिस के बुलावे पर अपनी ड्यूटी पर जाना पड़ा। उदास चांदनी को सासुमा ने प्यार से समझा-बुझाकर नई लाल सिल्क साड़ी और गहने दिलवाए।
जब चांद निकला, चांदनी ने छलनी से उसे देखा और अपने पति की याद में मनुहार की। तभी सही वक्त पर वीडियो कॉल आया — चंदन मुस्कुराते हुए सामने था। खुशी और प्यार से भरी यह पल सभी सुहागिनों के लिए भी आनंदमय था। सासू मां ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “इन्हें किसी की नज़र न लगे, इनके बीच अटूट प्यार बना रहे।”

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मन का डेमेंशिया

सोचो, हम क्या दे सकते हैं किसीको, बिना सोचे समझे। जीवन अस्थाई है, फिर भी हम उम्मीदों से जुड़े रहते हैं। स्वप्न, हादसे, बीमारियाँ, खुशी, दुख — सब चला जाता है, बस स्मृतियाँ रह जाती हैं। ये स्मृतियाँ अक्सर दूसरों के लिए शेष रहती हैं, हमारे लिए नहीं। डेमेंशिया जैसी बीमारी याददाश्त और भावनाओं को बदल देती है, हमें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ती है और प्रेम की ऊर्जा को कमजोर कर देती है। इसलिए बेहतर है कि हम दूसरों को उनके जैसे ही छोड़ दें, स्वयं के विचारों को बदलें और अपना बेस्ट दें ताकि हमारी स्मृतियाँ दूसरों के लिए यादगार बनें।

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दो सितारों का मिलन…42 साल बाद

बयालीस साल बाद हुई यह मुलाकात सिर्फ दो पुराने साथियों के मिलने भर की नहीं थी, बल्कि उन दिनों की धड़कनों को फिर से जी लेने जैसा अनुभव थी। इंदौर की गलियों में साइकिल से खबरों की तलाश में दौड़ते हुए बिताए गए वे दिन यादों की परतों से झाँकने लगे — अनंत चतुर्दशी की रातें, दंगों के बीच रिपोर्टिंग की बेचैनी, और श्मशानघाटों से जुटाई गई खबरों की जिम्मेदारी।

रतलाम के घर में बैठे हुए, चाय की प्यालियों के बीच समय जैसे ठहर गया था। हम दोनों बीच-बीच में ठहाके लगाते, कभी पुराने नामों को याद करते और कभी आज की पत्रकारिता पर अफसोस जताते। प्रदीप जब अपनी खबरों के डिजिटलाईजेशन की बात कर रहे थे, तो मन में एक अजीब कसक उठी — कुछ चीज़ें वक्त के साथ सँभाल लेनी चाहिए थीं।

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रूठे पिया

करवा चौथ की तैयारियों के बीच मन में अजीब सी उदासी थी। रवि की नाराज़गी ने त्योहार की सारी चमक जैसे बुझा दी थी। मैंने उनकी पसंद का खाना बनाकर उसमें “सॉरी” का कार्ड छुपा दिया, उम्मीद थी कि वे मुस्कुराएँगे, कॉल करेंगे — पर सन्नाटा ही जवाब बना रहा। शाम ढली तो आँसू ढलक पड़े। तभी दरवाज़े की घंटी बजी — सामने रवि थे, मुस्कराते हुए। बिना कुछ कहे उन्होंने मुझे बाँहों में भर लिया।

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करवा चौथ

साँझ के धुँधलके में जब दीपों की कतारें आँगन को सजाती हैं, हवा में करवा चौथ का सुगंधित उत्सव घुल जाता है। थाली में सिन्दूर, करवा में भरा प्यार — सब कुछ उस एक भाव के इर्द-गिर्द घूमता है जो समय की हर परीक्षा में अडिग रहा है। चाँद निकलने से पहले ही मन अपने चाँद को निहार लेता है — वही तो उसका सहारा है, वही उसका संसार। भूख-प्यास का एहसास प्रेम की ऊष्मा में कहीं विलीन हो जाता है। करवा की लौ झिलमिलाती है, जैसे रिश्तों की डोर — अटूट, पवित्र और उजली। प्रतीक्षा में बँधी आँखों में बस एक ही नाम गूंजता है, एक ही आकांक्षा साँसों में बसती है

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करवा चौथ: प्रेम, समर्पण और विश्वास का त्यौहार

करवा चौथ: केवल व्रत नहीं, यह पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह त्योहार महिलाओं को अपने परिवार और जीवनसाथी के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगने का अवसर देता है। नवविवाहित हों या अनुभवी, हर महिला के लिए यह व्रत रिश्तों में मधुरता और जीवन में सुकून लेकर आता है।

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