काली राख की बस्ती
कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,
यह कविता शब्दों की मर्यादा, मनकही अभिव्यक्तियों और स्मृतियों के माध्यम से प्रेम, प्रतीक्षा और चेतना के भावों को कोमलता से रचती है।
यह कविता सत्ता के अहंकार, चुनावी राजनीति और सामाजिक विभाजन पर तीखे सवाल खड़े करती है। “किसको ढोओगे” आम जनता की आवाज़ बनकर लोकतंत्र के मूल्यों की याद दिलाती है।
पुण्योदय के योग से हमें परमात्मा का जिन शासन और जैन कुल प्राप्त हुआ है. मनुष्य भव को सफल बनाने के लिए केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और विधिपूर्वक अष्टप्रकारी पूजा के साथ धर्म आराधना आवश्यक है. देव, गुरु और धर्म के प्रति जागृत भाव ही जीवन को सही दिशा देते हैं.
सासवड़ से शुरू हुए बजाज पुणे ग्रैंड टूर 2026 के तीसरे चरण ने पूरे क्षेत्र को रोमांच और जनउत्साह से भर दिया. उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई इस अंतरराष्ट्रीय साइकिलिंग रेस में गांव-गांव नागरिकों की भारी भागीदारी देखने को मिली. 137.7 किलोमीटर लंबे इस चुनौतीपूर्ण सफर में खेल भावना, साहस और जनसहयोग का अनूठा संगम नजर आया.
राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित व्यंग्य संकलन ‘व्यंग्य के रंग’ में उज्जैन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह की रचना का चयन शहर के लिए गौरव का विषय बना।
जीवन के हर पहले अनुभव ख़ुशी हो या पीड़ा हमारी स्मृतियों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। यह लेख उन्हीं अमिट यादों की भावनात्मक यात्रा है।
बसंत ऋतु बाह्य सौंदर्य से आगे बढ़कर आत्मा के जागरण का संदेश देती है। यह लेख ईश्वर-स्मरण, विरह-साधना और आत्मिक प्रकाश के माध्यम से आंतरिक बसंत की अनुभूति कराता है।
यह कविता सत्य, ईमान, सादगी और विश्वास पर आधारित जीवन-दृष्टि को उजागर करती है, जहाँ पवित्र प्रेम और आत्मसम्मान सर्वोपरि हैं।
कायरता को त्याग कर निर्भय संघर्ष का आह्वान करती यह कविता मनुष्य को लक्ष्य, धैर्य और कर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। वीर-रस का प्रभावशाली घोष।