नज़र आती है…
हर मुस्कान के पीछे एक अनकही कहानी होती है। ‘नज़र आती है’ कविता उन भावनाओं को स्वर देती है, जिन्हें लोग अक्सर दुनिया से छिपा लेते हैं। रिश्तों की सच्चाई, विश्वास का टूटना और भीतर का दर्द इस रचना को पाठकों के दिल के बेहद करीब ले आता है

हर मुस्कान के पीछे एक अनकही कहानी होती है। ‘नज़र आती है’ कविता उन भावनाओं को स्वर देती है, जिन्हें लोग अक्सर दुनिया से छिपा लेते हैं। रिश्तों की सच्चाई, विश्वास का टूटना और भीतर का दर्द इस रचना को पाठकों के दिल के बेहद करीब ले आता है
रिश्तों की सबसे बड़ी पूँजी छोटी-छोटी खुशियाँ होती हैं। यह कविता प्रेम, इकरार, मुलाक़ात और इंतज़ार के उन अनमोल पलों को संजोने का संदेश देती है, जहाँ मुस्कान और अपनापन ही रिश्ते की सबसे सुंदर पहचान बन जाते हैं।
यह कविता स्त्री के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्णय की प्रखर घोषणा है। इसमें वह हर उस सामाजिक बंधन, अग्निपरीक्षा और दोहरे मापदंड को चुनौती देती है, जो सदियों से उसके अस्तित्व को सीमित करते आए हैं। यह केवल विद्रोह नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, पहचान और स्वतंत्र व्यक्तित्व की निर्भीक उद्घोषणा है।
ज्ञान, विद्या, संगीत और संस्कृति की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती को समर्पित यह भावपूर्ण वंदना श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का सुंदर काव्यात्मक स्वर है। कविता में माँ सरस्वती के दिव्य स्वरूप, उनके ज्ञानमय आशीर्वाद और मानव जीवन में उनके महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया गया है।
एक सफल आईपीएस अधिकारी की ज़िंदगी का वह मोड़, जहाँ कर्तव्य, मातृत्व, परिवार और भविष्य की चिंता आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। यह संवेदनशील कहानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता के कठिन निर्णयों पर गहरा प्रश्न उठाती है।
कोलकाता से ट्रेन, गुवाहाटी से बस और फिर मेघालय की मनमोहक वादियों तक पहुँची यह पारिवारिक यात्रा केवल एक शादी में शामिल होने का सफ़र नहीं, बल्कि हँसी, अपनापन, रोमांच और प्रकृति की सुंदरता से भरा अविस्मरणीय संस्मरण है।
दहेज प्रथा पर आधारित यह विचारोत्तेजक लेख विवाह जैसे पवित्र संस्कार के बदलते स्वरूप, सामाजिक मानसिकता, आर्थिक दबाव, स्त्रीधन के अधिकार और आधुनिक समाज की वास्तविकताओं पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करता है। यह लेख पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।
प्रेम और विरह की गहन अनुभूति से सजी यह कविता चातक, स्वाति और मधुसूदन जैसे प्रतीकों के माध्यम से प्रतीक्षा, तड़प और आशा का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करती है। हर पंक्ति पाठक को भावनाओं की गहराई तक ले जाती है।
मुंबई के अंधेरी स्थित भवन्स कल्चरल सेंटर में आयोजित भव्य साहित्यिक समारोह में श्री बीरेंद्र शाह फाउंडेशन की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘विरासत’ के सातवें विशेषांक ‘रामायण की अवांतर कथाएँ’ तथा सुप्रसिद्ध लेखिका एवं प्रधान संपादक रागिनी बीरेंद्र शाह की नई पुस्तक ‘शब्द पुंज’ का लोकार्पण किया गया। देशभर से आए साहित्यकारों, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भारतीय परंपरा पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए।